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    ब्रॉड पीक की चोटी पर नहीं था जाने का प्लान, फिर अचानक वहां क्यों गए पर्वतारोही निर्मल पुरजा?

    By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
    Updated: Sat, 01 Aug 2026 08:12 PM (IST)

    निर्मल पुरजा के सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है कि शुरुआत में उनका प्लान ब्रॉड पीक की चोटी चढ़ने का नहीं था। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर अचानक ...और पढ़ें

    पर्वतारोही निर्मल निम्स पुरजा।

    पर्वतारोही निर्मल निम्स पुरजा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में अपने अदम्य साहस और रिकॉर्ड्स के लिए जाने जाने वाले प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल निम्स पुरजा का गुलाम कश्मीर स्थित ब्रॉड पीक पर आए एक भयानक हिमस्खलन की चपेट में आने से निधन हो गया है। उनकी कंपनी 'एलीट एक्सपेड' ने शनिवार को उनके निधन की पुष्टि की है। इस त्रासदी में उनके साथ गए अन्य गाइडों और साथियों के भी जीवित न बचने की आशंका है।

    दूसरी ओर पुरजा के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बता दें कि निर्मल पुरजा ने अपनी इस यात्रा से ठीक पहले 27 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर बताया था कि ब्रॉड पीक पर चढ़ाई करना उनके प्लान में शामिल नहीं है। 

    Nirmal Purja (2)

    प्लान में नहीं था शामिल तो क्यों गए पुरजा?

    मिली जानकारी के अनुसार पुरजा पाकिस्तान सिर्फ 'गैशरब्रूम-2' (G2) की चढ़ाई के लिए गए थे। लेकिन वहां पहुंचने से ठीक पहले उन्होंने अपने 8000 मीटर ऊंचे शिखरों के गणित को दोबारा देखा और महसूस किया कि अगर वे ब्रॉड पीक भी फतह कर लेते हैं, तो उनके सामने सिर्फ 'चो ओयु' ही बचेगा।

    अगर ऐसा होता तो वे बिना ऑक्सीजन के दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों को दो बार फतह करने वाले इतिहास के पहले इंसान बन जाते। इसी बड़े सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने ब्रॉड पीक की तरफ कदम बढ़ाए थे।

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    हादसे में दस पर्वतारोहियों को मारे जाने की आशंका

    गुरुवार को ब्रॉड पीक पर अचानक एक बड़ा हिमस्खलन आ गया। शुरुआत में उनके ट्रैकिंग डिवाइस में हलचल दिखने की वजह से उनके जीवित होने और सुरक्षित लौटने की उम्मीदें थीं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, उम्मीदें खत्म होती गईं।

    Nirmal Purja (3)

    बेस कैंप से उड़ाए गए एक ड्रोन की मदद से जब तलाशी ली गई, तो कैंप-1 के पास चार पर्वतारोहियों के शव दिखाई दिए, जिनमें निर्मल पुरजा, किली पेम्बा शेरपा, निमा शेरपा और वांग झोंग शामिल थे। बचाव दल के अनुसार, इस हिमस्खलन की चपेट में आए सभी 10 पर्वतारोहियों के मारे जाने की आशंका है।

    कौन थे निर्मल पुरजा'? 

    निर्मल पुरजा का जीवन उपलब्धियों और संघर्षों से भरा एक प्रेरणास्पद अध्याय रहा है। नेपाल में जन्मे निर्मल ने अपने जीवन के 16 साल सेना को दिए। उन्होंने 6 साल प्रतिष्ठित 'गोरखा रेजिमेंट' और 10 साल ब्रिटेन के 'स्पेशल फोर्सेज (SBS)' में सेवाएं दीं। उन्हें ब्रिटेन के प्रतिष्ठित सम्मान ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर का सदस्य (MBE) से भी नवाजा गया था।

    '14 पीक्स' का वो ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड

    इतना ही नहीं साल 2019 में उन्होंने महज 7 महीने से कम समय में दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों (जो 8,000 मीटर से अधिक ऊंची हैं) को फतह करके पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। उनके इस अद्भुत कारनामे पर नेटफ्लिक्स पर '14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल' नाम से एक प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है।

    अब समझिए कैसे हुई शुरुआत?

    गौरतलब है कि पुरजा का पर्वतारोहण का सफर काफी दिलचस्प था। साल 2012 में एवरेस्ट बेस कैंप की एक सामान्य ट्रेक के दौरान उन्होंने बीच में लौटने के बजाय सीधे शिखर तक जाने का फैसला किया और यहीं से उनके एक महान पर्वतारोही बनने की नींव पड़ी।

    Nirmal Purja

    अपने करियर के दौरान निर्मल पुरजा को कई बार आलोचनाओं और विवादों का भी सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी अपने मार्ग से भटखना मंजूर नहीं किया। अपने आखिरी पोस्ट में उन्होंने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए लिखा था कि जब मैंने 'प्रोजेक्ट पॉसिबल' के तहत बिना ऑक्सीजन के 14 चोटियां चढ़ी थीं, तब लोगों ने मेरी आलोचना की थी। अगर आपने वह संघर्ष देखना है, तो नेटफ्लिक्स पर '14 पीक्स' देखिए।

    पोस्ट में आलोचकों को दिया था करारा जवाब

    पुरजा ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि वह एकदम सच है। मैंने वहां दूसरे अभियानों द्वारा छोड़े गए पर्वतारोहियों की जान बचाई, खुद फंड जुटाया, खुद रस्सियां ठीक कीं, चीन से परमिट का झंझट सुलझाया और मां के ऑपरेशन के समय अस्पताल में भी मौजूद रहा। शोर बहुत था, लेकिन मैंने सुनना बंद कर दिया। उन्होंने यह भी सीख दी थी कि जिंदगी में कभी किसी दूसरे से मुकाबला मत करो, आपकी लड़ाई सिर्फ कल के खुद के इंसान से होनी चाहिए।

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