नेपाल बाढ़ की कहानी: इमारतों को निगल गया सैलाब, 2000 फीट चौड़े ग्लेशियर ने कैसे बदली काठमांडू की तस्वीर
नेपाल-चीन सीमा पर जलप्रलय ने भयानक तबाही मचाई, जिसमें इमारतें और गाड़ियाँ बह गईं, और 9 पुलिसकर्मी लापता हो गए।
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नेपाल-चीन सीमा पर जलप्रलय ने मचाई भारी तबाही (फोटो- पीटीआई)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को जलप्रलय का खौफनाक मंजर दिखा। नेपाल-तिब्बत बार्डर के चीनी हिस्से के सुरक्षा फुटेज में वे डरावने पल कैद हुए, जब चट्टानों, कीचड़ और पानी के सैलाब ने सब कुछ तहस नहस कर दिया।
ऐसा लगा मानों पानी के सैलाब ने राक्षस की तरह देखते दखते इमारतों व गाड़ियों को निगल लिया। वीडियो में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है।
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नेपाल-चीन सीमा पर जलप्रलय ने मचाई भारी तबाही
ग्यिरोंग के सीसीटीवी फुटेज में वह डरावना पल कैद हुआ जब नेपाल-चीन सीमा के पास घाटी में कीचड़ और पानी का सैलाब आया।
वीडियो में दिख रही इमारत में भारत से चीन तक सालाना मानसरोवर यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए इमिग्रेशन ऑफिस भी था। यह मानसरोवर तक जाने वाले कुछ रास्तों में से एक है।

वीडियो में लोगों को सुरक्षित जगह की ओर भागते हुए देखा जा सकता है। नेपाल के रसुवा जिले के ठीक सामने तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट से ली गई एक और तस्वीर में बाढ़ का पानी नेपाल की ओर बढ़ता दिखा, जिससे हर तरफ बर्बादी के निशान छूट गए।

नेपाल पुलिस के जारी तबाही के मंजर को कैद करने वाले एक अन्य वीडियो फुटेज में मलबे का ढेर भी दिखा दिया, जिससे पता चलता है कि बाढ़ का पानी कितनी दूर तक फैल गया था।
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पनबिजली केंद्रों को नुकसान, 430 मेगावाट बिजली बाधित
खबरों के अनुसार, इस सैलाब में पूरी की पूरी बस्तियां बह गईं, जबकि गाड़ियाँ, घर और निर्माण स्थल क्षतिग्रस्त हो गए। चीन की सीमा के पास स्थित तिमुरे बाजा और उसके पास के इलाके को भारी नुकसान पहुंचा। रसुवागढ़ी में हाल ही में दोबारा बनाया गया फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया।

इसे पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ के बाद फिर से बनाया गया था। तिमुरे में तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स के नौ जवान लापता बताए गए हैं। इस आपदा ने नेपाल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
सड़कें और पुल नष्ट हो गए और पनबिजली (हाइड्रोपावर) केंद्रों को नुकसान पहुंचा, जिससे लगभग 430 मेगावाट बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई। इंटरनेट मीडिया पर स्थानीय लोगों द्वारा साझा किए गए फुटेज से इस आपदा की भयावहता का पता चलता है।
