विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नेपाल बाढ़: शव न मिलने पर टूटी उम्मीदें, परिजनों ने 'कुश' के पुतले जलाकर दी अंतिम विदाई

Published: Fri, 28 Aug 2026 12:03 AM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 11:39 PM (IST)

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और नदी किनारों पर भटक ...और पढ़ें

शव न मिलने पर कुश के पुतलों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार (सांकेतिक तस्वीर)

शव न मिलने पर कुश के पुतलों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार (सांकेतिक तस्वीर)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बदहाल हुए अस्पतालों की स्थिति और भी बदतर है। यहां  सैंकड़ों लोग अपने स्वजनों की खोज-खबर लेने के लिए अलग-अलग अस्पतालों के बाहर घंटों जमा रहे।

वह अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों की तलाश में हैं जो अब तक लापता हैं। जबकि खोज अभियान नदी के किनारों और निचले क्षेत्रों में जारी है।

काठमांडू पोस्ट समाचार पत्र के अनुसार,जब बाढ़ ने रसुवा और नेपाल के अन्य केंद्रीय हिस्सों को निगल लिया तो महाराजगंज में त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में सैकड़ों लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश में जुटे थे।

WhatsApp Image 2026-09-02 at 11.43.09 PM

पवित्र घास 'कुश' से बने पुतलों का किया अंतिम संस्कार

बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट और रसुवा जिलों में लापता लोगों का कोई सुराग न मिलने पर उनके परिवारों ने पवित्र घास 'कुश' से बने पुतलों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। अस्पतालों, मुर्दाघरों और नदी तटों पर दिन-रात की तलाश के बाद जब शव नहीं मिले, तो परिजनों ने अनुष्ठानपूर्वक इन पुतलों को जलाकर अपने प्रियजनों को विदाई दी।

त्रिशुली नदी के किनारे परिवार एकत्रित हुए, जहाँ पुजारियों ने कुश से मानव आकृति बनाकर उसे लकड़ी की चिता पर रखा। इसके बाद आम शवयात्रा की तरह ही सभी वैदिक रीति-रिवाज पूरे किए गए, ताकि परिजन अपने शोक को अभिव्यक्त कर सकें। रासुवा में भी कई परिवारों ने निरंतर विफलता के बाद इसी प्रतीकात्मक विधि का सहारा लिया।

अपनों की तलाश में भटकते परिजन

26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी राजधानी काठमांडू का त्रिभुवन अस्पताल त्रासदी की दर्द बयां कर रहा है। अस्पताल परिसर में फैली दुर्गंध और बाहर लटकती तस्वीरें इस भयानक आपदा का जीता जगता सबूत हैं।

बाढ़ के कारण अब तक 1,200 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। डॉक्टरों को शवों की पहचान करने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

NEPAL

शवों का प्रतीकात्मक दाह संस्कार

संक्रमण फैलने से रोकने के लिए चितवन और नुवाकोट जैसे जिलों में अज्ञात और पहचाने गए शवों को अस्थायी रूप से दफनाया जा रहा है।

चितवन में डीएनए मिलान के बाद शवों को आसानी से निकालने के लिए 1.5 मीटर गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं। वहीं, हिंदू परंपराओं के बावजूद अपनों के अवशेष न मिलने पर नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे पुआल की मूर्तियां बनाकर प्रतीकात्मक दाह संस्कार किया जा रहा है।

WhatsApp Image 2026-09-02 at 11.43.24 PM

नेपाल की मुआवजे की मांग

नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने कहा कि नेपाल उस जलवायु परिवर्तन की भारी कीमत चुका रहा है, जिसे उसने पैदा नहीं किया। नेपाल का उत्सर्जन नगण्य है, जबकि चीन (30%), अमेरिका (13%) और भारत (8%) प्रमुख उत्सर्जक हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को जलवायु क्षतिपूर्ति का औपचारिक दावा भेजा है। यदि हिमालयी ग्लेशियर गायब हुए, तो दक्षिण एशिया के 2 अरब लोगों की जल सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। नेपाल इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिकार और न्याय के रूप में उठाएगा।

Nepal floods (8)

परिजन लापता लोगों की तलाश में भटक रहे 

बीते बुधवार की सुबह जब बाढ़ ने रसुवा और नेपाल के अन्य केंद्रीय हिस्सों को प्रभावित किया और त्रिशुली और नारायणी नदी प्रणालियों के साथ नीचे की ओर बढ़ गई, यह सभी तब से उनके संपर्क में नहीं थे।

कई परिवारों के सदस्य अपने प्रियजनों की तस्वीरें बोर्ड पर प्रदर्शित कर रहे थे, जिसमें उनके पते और मोबाइल नंबर भी थे, और लोगों से अनुरोध कर रहे थे कि वे उन्हें खोजने में मदद करें।

प्रशासन त्रिशुली और नारायणी नदियों से निकाले गए शवों की बढ़ती संख्या से निपट रहा था। भैरवपुर अस्पताल में शवगृह में जगह खत्म होने की सूचना मिली थी।

WhatsApp Image 2026-09-02 at 11.43.18 PM

कई अस्पतालों में घायलों का चक रहा इलाज 

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा,पड़ोसी तनहुं में निकाले गए नौ शवों को जिले में वापस भेजा गया क्योंकि भैरवपुर सुविधा में उनके लिए कोई जगह नहीं थी।

प्रशासन ने अस्पताल में लाए गए लोगों की सूचियां पोस्ट की थीं ताकि रिश्तेदार यह जांच सकें कि क्या उनके प्रियजन उन लोगों में हैं जिन्हें बचाया गया है या जो उपचार प्राप्त कर रहे हैं। अस्पताल में मृतकों की तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं।

अधिकारियों ने लापता लोगों के नाम और अन्य विवरण रिकार्ड करने के लिए डेस्क स्थापित किए, क्योंकि परिवार के सदस्य लापता लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड घायलों से पटे पड़े हैं।

नेपाल के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के अलावा नुवाकोट के त्रिशुली अस्पताल और काठमांडू के बिर अस्पताल में घायलों का इलाज किया जा रहा है।

लापता व्यक्ति के एक रिश्तेदार ने काठमांडू के राष्ट्रीय ट्रामा सेंटर के बाहर अपने साले की तलाश में उसके फोटो का बोर्ड बनाकर सबको दिखाया। भैरवपुर अस्पताल में भी दृश्य समान थे, जहां रिश्तेदारों की तलाश जारी है।

यह भी पढ़ें- नेपाल में महाविनाश काउंट डाउन: चीन की चेतावनी, नेपाल के लिए अगले 72 घंटे भारी

यह भी पढ़ें- 'हमारी आंखों के सामने बस्ती तबाह हो गई...', नेपाल त्रासदी का मंजर बयां कर रो पड़े लोग

यह भी पढ़ें- नेपाल बाढ़ त्रासदी: कहां मची सबसे ज्यादा तबाही? तस्वीरों में देखें पूरा मंजर

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।