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11 साल पहले आए भूकंप से भी कठिन ऑपरेशन, नेपाल की पहली महिला पायलट ने 6 दिन में किए 100+ रेस्क्यू मिशन

Published: Tue, 01 Sep 2026 10:33 PM (IST)Updated: Wed, 02 Sep 2026 06:01 PM (IST)

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच, पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय में 100 से अधिक बचाव मिशन पूरे किए हैं।

कैप्टन प्रिया अधिकारी ने किए 100 से अधिक बचाव मिशन

कैप्टन प्रिया अधिकारी ने किए 100 से अधिक बचाव मिशन

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डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने देश के कई इलाकों में भयंकर तबाही मचा दी है। इस संकट की घड़ी में एक हेलीकॉप्टर पायलट ने सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में लगातार उड़ानें भरकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और शवों को बरामद करने में अहम भूमिका निभाई है।

नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय में लगभग 100 रेस्क्यू मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। 41 साल की यह हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू पायलट हिमालयी क्षेत्रों में काम कर रही हैं। उन्होंने रसुवा जिले के बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित तिमुरे इलाके सहित कई कठिन इलाकों पर जोखिम भरे ऑपरेशन चलाए।

CNN की खबर के अनुसार, पायलट ने इस रेस्क्यू अभियान को अपने पूरे करियर का सबसे कठिन अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि इस आपदा से निपटना 2015 के नेपाल भूकंप से भी अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि तबाही का बड़ा हिस्सा एक संकरी घाटी में था, जहां पहुंचना कठिन था।

कौन हैं प्रिया अधिकारी?

प्रिया एक अनुभवी हाई-एल्टीट्यूड हेलीकॉप्टर पायलट हैं, जिन्होंने हिमालय में कई सालों तक सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए हैं। उनके मिशन में बहुत ज्यादा ऊंचाई पर घायल पर्वतारोहियों को बचाना शामिल रहा है और कुछ उड़ानों में उन्हें लगभग 6200 मीटर की ऊंचाई तक जाना पड़ा है।

अधिकारी का एविएशन का सफर आसान नहीं था। उन्होंने एनवायरनमेंटल साइंस की पढ़ाई की और शुरुआत में केबिन क्रू के तौर पर काम किया।

हेलीकॉप्टर की एक जॉयराइड ने उनमें उड़ान भरने की दिलचस्पी जगाई, जिसके बाद वह हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस गईं। फ्लाइंग घंटे पूरे करने के बाद, वह 2017 में फ़ुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बनीं और आगे चलकर हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में महारत हासिल की।

मुश्किल इलाकों में जोखिम भरा ऑपरेशन 

मौजूदा बचाव अभियान का दायरा बहुत बड़ा रहा है। तिमुरे के आसपास के मिशन में लगभग 20 हेलीकॉप्टर शामिल रहे हैं, और कई बार एक ही छोटे से इलाके में एक साथ कई विमान काम करते रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि बचे हुए लोगों को निकालने के लिए कभी-कभी पांच या छह हेलीकॉप्टरों को लगभग एक साथ उतरना पड़ता है। अपनी गतिविधियों में तालमेल बिठाने, टकराव से बचने और यह पक्का करने के लिए कि वे सभी एक ही जगह न जा रहे हों, पायलट लगातार रेडियो पर बातचीत करते रहते हैं।

वहां का इलाका भी एक बड़ा खतरा पैदा करता है। अचानक आई बाढ़ और ज़मीन खिसकने (मडस्लाइड) की वजह से प्रभावित इलाकों के कुछ हिस्सों में अस्थिर कीचड़ की मोटी परतें जमा हो गई हैं। हवा से देखने पर जमीन ठोस लग सकती है, लेकिन पायलट हमेशा यह नहीं बता पाते कि वह हेलीकॉप्टर का भार सह पाएगी या नहीं।

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