Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 06, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    श्रीलंका में फैली हिंसा के पीछे 'जबरन धर्मांतरण' है बड़ी वजह, लगा आपातकाल

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Wed, 07 Mar 2018 11:23 AM (IST)

    श्रीलंका में जबरन धर्मांतरण की खबर ने वहां के बौद्ध संप्रदाय में लगी चिंगारी को भड़काने का काम किया। ...और पढ़ें

    श्रीलंका में फैली हिंसा के पीछे 'जबरन धर्मांतरण' है बड़ी वजह, लगा आपातकाल
    श्रीलंका में फैली हिंसा के पीछे 'जबरन धर्मांतरण' है बड़ी वजह, लगा आपातकाल

    नई दिल्ली [स्‍पेशल डेस्‍क]। श्रीलंका सरकार ने देश में दस दिनों के लिए आपातकाल लागू कर दिया है। आपातकाल का यह फैसला देश के कई इलाकों में फैली हिंसा को देखते हुए लिया गया है। हालांकि सरकारी तौर पर इसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है। श्रीलंका की मीडिया के मुताबिक इसको कुछ देर में जारी कर दिया जाएगा। बहरहाल, अचानक आपातकाल लगाए जाने की खबर ने सभी को चौंकाने का काम जरूर किया है। यह उस वक्‍त लगाया गया है जब भारतीय क्रिकेट टीम कोलंबो में टी-20 मैच खेलने के लिए मौजूद है। हालांकि बीसीसीआई की तरफ से साफ कर दिया गया है कि आपातकाल की घोषणा के बाद मैच में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह राहत भरी खबर जरूर हो सकती है। लेकिन श्रीलंका के लिए आपातकाल की घोषणा फिर भी हैरान करने वाली है। बहरहाल, आपातकाल की इस घोषणा के पीछे की वजह को जानना और समझना बेहद जरूरी है।

    एक दिन का परिणाम नहीं हिंसा

    दरअसल, श्रीलंका में फैली हिंसा कोई एक दिन का परिणाम नहीं है बल्कि वहां की जनता में फैल रहे आक्रोश को इंगित करती है। यह आक्रोश रोहिंग्‍या मुसलमानों की बढ़ती आबादी को लेकर है। आपको बता दें कि पिछले माह 22 फरवरी को एक दुकान के बाहर एक ट्रक ड्राइवर की हत्‍या कर दी गई थी। इसके बाद वहां पर लगातार तनाव फैला था। इस आक्रोश को उबलता हुआ उस वक्‍त देखा गया जब ड्राइवर के अंतिम संस्‍कार के वक्‍त गुस्‍साए लोगों ने वहां पर दुकानों को खाक कर दिया और एक व्‍यक्ति की हत्‍या कर दी। इसके बाद यह हिंसा देश के दूसरे इलाकों में फैल गई।

    श्रीलंका में बौद्ध बहुसंख्‍यक

    इस बाबत बात करते हुए ऑब्‍जर्वर रिसर्च फांउडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने कहा कि श्रीलंका में बौद्ध बहुसंख्‍यक हैं। वह यहां पर करीब 70 फीसद हैं जबकि मुसिल्‍म यहां पर करीब 12 फीसद हैं। उनका कहना है कि श्रीलंका में पिछले कुछ समय से यहां पर आ रहे रोहिंग्‍या मुसिल्‍मों को लेकर रोष व्‍याप्‍त है। पिछले दिनों यह भी बात सामने आई थी कि यहां पर मुस्लिम धर्मांतरण करा रहे हैं। इसको लेकर वहां पर रोष व्‍याप्‍त है। आपको यहां पर यह बताना जरूरी होगा कि पिछले दिनों म्‍यांमार में रोहिंग्‍या संकट खड़ा हुआ था। इसके बाद रोहिंग्‍या मुस्लिम भारत के कुछ राज्‍यों के अलावा बांग्‍लादेश और श्रीलंका में भी विस्‍थापित हुए थे। उस वक्‍त इनको मानवीय आधार पर शरण दी गई थी।

    चिंगारी को भड़काने का काम

    लेकिन श्रीलंका में जबरन धर्मांतरण की खबर ने वहां के बौद्ध संप्रदाय में लगी चिंगारी को भड़काने का काम किया। इसके बाद ट्रक ड्राइवर की हत्‍या ने उसको हवा दी। यही अब श्रीलंका के विभिन्‍न इलाकों में धधक रही है। रोहिंग्‍या मुसलमानों की मौजूदगी के खिलाफ श्रीलंका में आवाजें भी उठी हैं। हालांकि वह इस बात से इंकार करते हैं कि यह वर्चस्‍व को लेकर लड़ाई है, क्‍योंकि श्रीलंका में मुस्लिम की आबादी काफी कम है। लेकिन वो ये भी कहते हैं कि दोनों संप्रदायों के बीच खटास बढ़ रही है। इसको रोकने या कम करने में वहां की सरकार नाकाम रही है। वह ये भी कहते हैं कि फिलहाल इसके पीछे कोई राजनीतिक सोच दिखाई नहीं दे रही है और न ही इसको लेकर वहां के किसी नेता ने बयान जारी किया है। लेकिन हां इतना जरूर हो सकता है कि आने वाले समय में ऐसा देखने को मिले।

    खबरें और भी