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    यूरोप में शरणार्थियों और प्रवासियों के प्रवेश पर लगी सख्त पाबंदियां, बॉर्डर पार करना होगा काफी मुश्किल

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:48 PM (GMT+05:30)

    दुनियाभर में इमीग्रेश का मुद्दा अब मानवीय नहीं बल्कि राजनीतिक बन गया है। वहीं, यूरोप में इमीग्रेशन अब सिर्फ मानवीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह महाद्वीप ...और पढ़ें

    यूरोप में शरणार्थियों और प्रवासियों के प्रवेश पर लगी सख्त पाबंदियां (फोटो- रॉयटर)

    यूरोप में शरणार्थियों और प्रवासियों के प्रवेश पर लगी सख्त पाबंदियां (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. 2015 में सीरियाई युद्ध के दौरान एक लाख से ज्यादा शरणार्थियों के यूरोप में प्रवेश किया

    2. हाल ही में स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूता में हजारों प्रवासियों ने घुसने की कोशिश की थी

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में इमीग्रेश का मुद्दा अब मानवीय नहीं बल्कि राजनीतिक बन गया है। वहीं, यूरोप में इमीग्रेशन अब सिर्फ मानवीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह महाद्वीप की सबसे बड़ी राजनीतिक विभाजन रेखा बन चुका है।

    स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूता में हजारों प्रवासियों के समुद्र पार कर घुसने की हालिया घटनाओं ने एक बार फिर इस संकट को दुनिया के सामने ला दिया है।

    2015 में सीरियाई युद्ध के दौरान एक लाख से ज्यादा शरणार्थियों के यूरोप पहुंचने के बाद शुरू हुई इस बहस ने अब स्थायी रूप ले लिया है। तब जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल का बयान हम इसे संभाल लेंगे उदार नीति का प्रतीक बना था।

    लेकिन अब बर्लिन, पेरिस, एम्स्टर्डम, डबलिन और मैड्रिड में सरकारें शरण नियमों को सख्त कर रही हैं, शेंगेन क्षेत्र में सीमा जांच बहाल कर रही हैं और पड़ोसी देशों के साथ समझौते कर प्रवासियों को यूरोप पहुंचने से पहले ही रोकने की कोशिश कर रही हैं।

    घरेलू दबाव और राजनीतिक बदलाव

    आवास की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं और स्कूलों पर बढ़ता बोझ, तथा कुछ देशों में अपराध की घटनाओं ने जनता के गुस्से को भड़काया है।

    जर्मनी में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी), फ्रांस में मरीन ले पेन की नेशनल रैली, इटली में जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी, नीदरलैंड्स में गीर्ट वाइल्डर्स की पार्टी फॉर फ्रीडम और अन्य देशों में स्वीडन डेमोक्रेट्स व स्पेन की वोक्स जैसी पार्टियां इमीग्रेशन विरोध के मुद्दे पर चुनावी सफलता हासिल कर रही हैं।

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    विशेषज्ञों के अनुसार, इमीग्रेशन अब सिर्फ संख्या का मुद्दा नहीं रह गया। यह सरकारों की सीमा नियंत्रण क्षमता और अपने फैसलों को लागू करने की क्षमता का परीक्षण बन गया है। 2025 में यूरोपीय संघ में शरण आवेदनों में भारी गिरावट आई, फिर भी जनता की चिंता कम नहीं हुई।

    जनसांख्यिकीय विरोधाभास

    यूरोप को आर्थिक रूप से आप्रवासियों की जरूरत है। घटती जन्म दर और बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण स्वास्थ्य, निर्माण, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में श्रमिकों की भारी कमी है। बिना इमीग्रेशन के यूरोपीय संघ की आबादी 2100 तक करीब 30 करोड़ तक गिर सकती है। फिर भी राजनीतिक रूप से यह मुद्दा अलोकप्रिय हो गया है।