यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राम रहीम की 'एमएसजी-2' में दिखेगी आदिवासी समाज की कड़वी सच्चाई
आखिरकार लंबे समय तक विवादों में घिरी रहने के बाद संत गुरमीत राम रहीम सिंह की फिल्म 'एमएसजी-2 : द मैसेंजर' इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। यह उनकी इसी साल की शुरुआत में आई फिल्म 'एमएसजी : द मैसेंजर' का सीक्वल है।

मुंबई। आखिरकार लंबे समय तक विवादों में घिरी रहने के बाद संत गुरमीत राम रहीम सिंह की फिल्म 'एमएसजी-2 : द मैसेंजर' इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। यह उनकी इसी साल की शुरुआत में आई फिल्म 'एमएसजी : द मैसेंजर' का सीक्वल है।
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'एमएसजी-2' के बारे में बात करते हुए राम रहीम ने बताया कि यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जिसमें दर्शकों को आदिवासी समाज के रहन-सहन के बारे में पता चलेगा और किस तरह यह समाज अपनी अंतरात्मा से समझौता करते हुए खुद को परिस्थिति के अनुरूप ढाल लेता है, इस सच्चाई से भी सामना होगा।
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इसके साथ ही फिल्म के माध्यम से दर्शकों को अंधविश्वास और आदिवासी समाज से जुड़े मामलों पर सामाजिक संदेश भी दिया गया है। 'एमएसजी-2' का निर्देशन राम रहीम और जीतू अरोरा ने किया है। राम रहीम ने फिल्म 'एमएसजी : द मैसेंजर' से ही फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।

