मूलांक 4 वाली ननद और 5 वाली भौजाई के बीच हमेशा बनी रहती नोकझोंक, जानें वजह और उपाय
अंकशास्त्र के अनुसार, मूलांक 4 और 5 वाली ननद-भौजाई के रिश्तों में अक्सर खटपट रहती है, ऐसा क्यों होता है और इसे कैसे रोका जा सकता है, जानने के लिए पढ़ ...और पढ़ें

मूलांक 4 और 5 की ननद-भौजाई का रिश्ता होता है ऐसा (Picture Credit- AI Generated)रिश्ता

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कुछ रिश्ते बेहद नाजुक होते हैं। ननद-भौजाई का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही होता है। तालमेल बैठ जाए तो ननद-भौजाई एक दुसरे की पक्की सहेलियां बन जाती हैं और कभी-कभी थोड़ी सेटिंग बिगड़ जाए, तो एक दूसरे से मुंह भी फुला लेती हैं। अंकशास्त्र के आधार पर देखा जाए तो मूलांक 4 और 5 वाली ननद भौजाई में कभी नहीं पटती है। लाख कोशिशों के बाद भी इनके रिश्ते में खटपट बनी ही रहती है। चलिए आज इसके मुख्य कारण जानते हैं।
मूलांक 4 और 5 का संबंध कैसा होता है?
अंकशास्त्र के अनुसार 4 नंबर राहु का प्रतिनिधित्व करता है और अंक 5 बुध के स्वामित्व वाला होता है। ज्योतिष गणनाओं में बुध को तर्क और बुद्धि का कारक माना गया है, वहीं राहु को भ्रम और रहस्य से जोड़ा जाता है। ऐसे में 4 और 5 अंक वाले जातकों की कभी भी आपस में नहीं बनती है।
ननद और भौजाई यदि मूलांक 4 और 5 वाली हैं, तो एक तर्कशील होगी, तो दूसरी भ्रम पैदा करने की कोशिश करेगी। एक बुद्धि का इस्तेमाल करेगी तो दूसरी चालाकी दिखाएगी। ऐसे में दोनों के मध्य हमेशा बहस होती रहेगी।
(Picture Credit- AI Generated)
आजादी बनाम अनुशासन का झगड़ा
मूलांक 5 वाले स्वभाव से चुलबुले होते हैं। इन्हें बातें करना भी बहुत अधिक पसंद होता है। यदि भौजाई 5 अंक वाली है और ननद 4 अंक वाली है, तो झगड़े निश्चित ही होने हैं। इनके रिश्ते में आजादी बनाम अनुशासन की लड़ाई रहती है। भाभी को अपनी मर्जी से काम करना है, तो ननद अनुशासनप्रिय होती है और रोक-टोक लगाना उसकी आदत होती है। इसलिए दोनों में कभी नहीं बनती।
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'मैं हूं बेस्ट' का मसला
अंक 4 और अंक 5 के बीच हमेशा स्वामित्व को लेकर झगड़ा रहता है। जहां मूलांक 4 वालों की धारणा होती है कि वह हर काम नियम के साथ करते हैं, तो उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता है।वहीं दूसरी तरहफ अंक 5 वाले स्वतंत्रता प्रेमी होते हैं, उन्हें परिवर्तन पसंद होता है। एक नियम में बंधकर वह जीवन नहीं जी सकते हैं। निरंतर बदलाव के साथ आगे बढ़ना उनके जीवन की कुंजी होती है।अपनी इस सोच को वह सबसे अच्छा मानते हैं। ऐसे में 4 और 5 अंक वाली ननद और भोजाई नदी के दो अलग-अलग छोर पर खड़े पाए जाते हैं और खुद को एक दूसरे से बेस्ट मानने की धारणा रखते हैं।
बातचीत के तरीके से होती है परेशानी
मूलांक 4 वालों को दायरे में रहकर और नपे-तुले शब्दों में बातचीत करना पसंद होता है, वहीं मूलांक 5 वाले इसके विपरीत होते हैं। मूलांक 4 वालों को अंक 5 वालों के मुंहफट होने से सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए भी इन दोनों अंक की ननद-भौजाई की आपस में कभी भी नहीं बनती है।
अतः ननद और भौजाई दोनों को ही श्री गणेश की शरण में जाना चाहिए। श्री गणेश को ज्ञान एवं बुद्धि का देवता माना गया है। इनकी आराधना करने से दोनों के स्वभाव में सुधार होगा और आपसी समझ भी बढ़ेगी।
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