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    नेपाल में तनाव, भारत में चौकसी: 3 मौतों के बाद बॉर्डर सील, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की पैनी नजर

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 04:58 PM (GMT+05:30)

    नेपाल में 26 जुलाई को भड़की सांप्रदायिक हिंसा के 10 दिन बाद भी भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त है और आम जनजीवन प्रभावित है। ...और पढ़ें

    नेपाल हिंसा के दस दिन बाद भी सीमा पर सख्त पहरा, जनजीवन पर बढ़ा असर

    नेपाल हिंसा के दस दिन बाद भी सीमा पर सख्त पहरा, जनजीवन पर बढ़ा असर

    HighLights

    1. नेपाल हिंसा के 10 दिन बाद भी सीमा पर सख्ती।

    2. भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत।

    3. सीमावर्ती गांवों में आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित।

    संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। नरपतगंज प्रखंड के फुलकाहा थाना क्षेत्र अंतर्गत मानिकपुर बॉर्डर से डेढ़ किलोमीटर उत्तर नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज गांवपालिका स्थित कप्तानगंज में 26 जुलाई को भड़की सांप्रदायिक हिंसा का असर दसवें दिन भी भारत-नेपाल सीमा पर साफ दिखाई दे रहा है।

    अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत फुलकाहा थाना क्षेत्र से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह पूरी तरह सख्त है। सीमा पार आम लोगों की आवाजाही पर रोक जारी है और एसएसबी, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) तथा बिहार पुलिस संयुक्त रूप से हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

    सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या भी इससे प्रभावित हुई है। रोजमर्रा के काम, छोटे कारोबार और सीमा पार होने वाले सामाजिक संपर्क लगभग ठप पड़े हैं।

    26 जुलाई की रात नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज गांवपालिका के कप्तानगंज में कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया था। हालात नियंत्रित करने के दौरान हुई फायरिंग और हिंसा में पहले 24 वर्षीय ओमप्रकाश मेहता की मौत हुई।

    इसके बाद घायल 22 वर्षीय जयप्रकाश मेहता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, गंभीर रूप से घायल 22 वर्षीय रविंद्र मेहता की मंगलवार को काठमांडू में इलाज के दौरान मौत हो गई। तीन युवकों की मौत के बाद नेपाल के विभिन्न हिस्सों में तनाव और बढ़ गया था, जिसके मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया गया।

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    फुलकाहा, मानिकपुर, कोशिकापुर, पथराहा सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में एसएसबी के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। सीमा के प्रत्येक प्रवेश मार्ग पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्ध व्यक्तियों और गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी शरारती तत्व को भारतीय सीमा में प्रवेश का मौका न मिल सके।

    सीमा क्षेत्र में समय-समय पर संयुक्त फ्लैग मार्च भी निकाला जा रहा है और ग्रामीणों से शांति एवं सतर्कता बनाए रखने की अपील की जा रही है।

    फुलकाहा बीओपी प्रभारी सहायक सेनानायक राणा कुमार ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है। एसएसबी के जवान चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर तैनात हैं और वरीय अधिकारियों के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सीमा पर किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भी सहायता ली जा रही है।

    उधर, प्रशासन का कहना है कि नेपाल में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य घोषित होने तक भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं दी जाएगी। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने, शांति बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या एसएसबी को देने की अपील की गई है।

    सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा की सतर्क निगरानी ही दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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