नेपाल ने पानी छोड़कर बिहार में बढ़ाई परेशानी, अररिया के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा
नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र से पानी छोड़े जाने के कारण अररिया के सिकटी प्रखंड में नूना और बकरा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में बा ...और पढ़ें

नूना नदी उफनाई। फोटो जागरण
HighLights
नेपाल से पानी छोड़े जाने से नूना, बकरा नदियों का जलस्तर बढ़ा।
अररिया के सिकटी प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा।
औलाबाड़ी गांव में कटाव का खतरा, स्कूल भी कटान के मुहाने पर।
संवाद सूत्र, सिकटी (अररिया)। नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र से पानी छोड़े जाने के कारण प्रखंड क्षेत्र के पूर्वी भाग होकर बहने वाली नूना व पश्चिमी क्षेत्र के बकरा नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है।
ये नदियां अपने दोनों किनारे से ऊपर बह रही है, जिससे निचले क्षेत्रों में तीन से चार फीट पानी बह रही है। साथ ही खोरागाछ पंचायत के औलाबाडी गांव में कटाव का खतरा बढ गया है।
वार्ड संख्या 15 स्थित प्राथमिक विद्यालय मलदहिया टोला औलाबाडी कटान के मुहाने पर खड़ा है। पिछले साल बाढ में इस विद्यालय के पूर्वी भाग का विद्यालय भवन कट कर ध्वस्त हो गया था।
विद्यालय के अलावे औलाबाडी गांव के दर्जनों परिवार का घर कटान के कगार पर है। प्रावि मलदहिया टोला को नदी कभी भी अपने आगोश में समेट सकती है।
वहीं, मध्य विद्यालय सिंघिया में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। नूना के जलस्तर में एकाएक वृद्धि होने से कालू चौक से उत्तर पूर्वी भाग के सिंघिया, खोरागाछ वार्ड संख्या 12, कचना, छपनिया, औलाबाड़ी, बच्चा खाड़ी, पिपरा बिजवार, भट्टा बाड़ी गांव के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।
बकरा नदी के जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी
साथ हीं बकरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से तीरा, नेमुआ, पड़रिया, डैनिया के लोग बाढ़ को लेकर सशंकित हैं। पूर्वी क्षेत्र के स्थानीय निवासी जाबुन ऋषिदेव, इस्लामुद्दीन, एकरामुल हक, मुर्तज़ा, हातिम सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि नूना में पानी बढ़ने से यहां के लोग दहशत में है।
यदि समय रहते बचाव कार्य नहीं किया गया तो औलाबाडी गांव का अस्तित्व बचना मुश्किल हो जाएगा। वही पड़रिया, कालूचौक, सिंघिया, बांसबाडी होकर बहने वाली नूना नदी में पानी लबालब भरा हुआ है। इधर थोडी सी जलस्तर में वृद्धि हुई तो गांव में दो से तीन फीट पानी भर जाएगा।
डर के साये में ग्रामीण
नेपाल की ओर से बहने वाली नदियां, जिसका रूप भारतीय क्षेत्र में अपनी भयावहता के लिए प्रचलित है। सीमावर्ती प्रखंड क्षेत्र होकर बहने वाली नदियों की विकराल स्थिति को देखते हुए लोगो के मन में एक अंजना सा भय दिखने लगा है।
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नूना से प्रखंड के पूर्वी भाग में एक प्रलंयकारी स्थिति रहती है, जिससे लोग त्रस्त रहते हैं। नूना के कहर से हर साल सिंघिया, सालगोड़ी, कचना, खोरागाछ, मोमिन टोला, गंनगई टोला, छपनिया, पीपरा बिजवार आदि गांवों में पानी प्रवेश कर जाता है।
सिकटी अंचल पदाधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि नूना में अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। औलाबाडी में हो रहे कटान की स्थिति से जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है। नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।