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    अरवल के भैंसासुर आहर का होगा जीर्णोद्धार, 30 गांव के किसानों को मिलेगी सिंचाई की सुविधा

    Updated: Sun, 31 May 2026 04:51 PM (IST)

    अरवल जिले के करपी प्रखंड में स्थित मुगलकालीन भैंसासुर आहर का पहली बार लघु सिंचाई विभाग द्वारा जीर्णोद्धार किया जाएगा। ...और पढ़ें

    भैंसासुर आहर का होगा जीर्णोद्धार। (जागरण)

    भैंसासुर आहर का होगा जीर्णोद्धार। (जागरण)

    HighLights

    1. मुगलकालीन भैंसासुर आहर का होगा जीर्णोद्धार कार्य शुरू।

    2. अरवल-पटना के 10 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा।

    3. गाद भरने से हुई समस्या, अब किसानों को मिलेगा लाभ।

    जागरण संवाददाता, अरवल। जिले के करपी प्रखंड में अवस्थित मुगलकालीन भैंसासुर आहर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार लघु सिंचाई विभाग के द्वारा आहर की उड़ाही की जाएगी। इसके लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है।

    जिला के सबसे प्राचीन और बड़ा यह आहर अरवल और पटना जिले के 10 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का मुख्य साधन है। रामपुर के 85 वर्षीय किसान अवधेश सिंह ने बताया कि यह मुगलकालीन भैंसासुर आहर का निर्माण 1621 ईस्वी में कराया गया था।

    उसके बाद ब्रिटिश काल 1880 में इसका जीर्णोद्धार हुआ इसके बाद इसमें भदासी से आईयरा और रामपुर गांव आने के लिए बोट चलता था।

    ब्रिटिश शासन में इसमें पानी की कमी नहीं हो इसके लिए आईयरा रजवाहा की समाप्ति इसी आहर में किया गया। इसके अलावा भदासी और रोहाई का नाला भी इसी में गिराया गया।

    यह आहर 8 हजार फिट लंबा और 4 हजार फिट चौड़ा है। सैकड़ों साल से उड़ाही नहीं होने से अब इसमें गर्मी के दिनों में पानी नही रहता हैं।

    उड़ाही होने पर दो जिले के किसानों को होगा फायदा

    किसान सत्येंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, सुनील सिंह ने बताया कि किसानों के सिंचाई करने के लिए इस आहर में एक दर्जन से अधिक सुलिस गेट हैं जिससे जिले के 30 गांव के किसान सिंचाई करते हैं।

    इसके अलावा पटना जिले के भी दो दर्जन गांव के किसान सिंचाई के लिए इसी आहर पर निर्भर है। उड़ाही नहीं होने से आहर में गाद भर गया है जिसके कारण रबी फसल के सिंचाई में पानी नहीं मिलता हैं। खरीफ फसल की सिंचाई इसी आहर से आज भी किसान करते है।

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    जिले का सबसे बड़ा यह जलकर है। इसके जीर्णोद्धार के लिए सर्वे का कार्य शुरू है। जल्द ही इसकी उड़ाही और टूटे सुलिस गेट और तटबंध की मरम्मती कराई जाएगी। पानी आहर में संरक्षित रहने से सिंचाई के साथ जल संरक्षण भी होगा

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    मनोहर कुमार, कनीय अभियंता, लघु सिंचाई विभाग