योगिनी एकादशी व्रत से मिटेंगे अनजाने में हुए पाप, उदया तिथि के अभाव में 10 जुलाई को होगी पूजा
योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जाएगी, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत अनजाने में हुए पापों का नाश करता ...और पढ़ें

योगिनी एकादशी व्रत से मिटेंगे अनजाने में हुए पाप
HighLights
योगिनी एकादशी 10 जुलाई को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी।
यह व्रत पापों का नाश कर सुख-समृद्धि लाता है।
भगवान विष्णु की पूजा और दान से पितर तृप्त होते हैं।
संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पितरों की तृप्ति और वंश वृद्धि के लिए व्रत
आचार्य हर्ष मिश्रा ने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हुए भी इस दिन अपने भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करते हैं और उनके कष्टों का निवारण करते हैं। यह व्रत पितरों की तृप्ति और वंश वृद्धि के लिए भी शुभ माना जाता है।
ऐसे करें व्रत और पूजन
एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु का पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप एवं पंचामृत से पूजन किया जाता है। श्रद्धालु दिनभर निर्जल अथवा फलाहार व्रत रखकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हैं। सायंकाल विष्णु सहस्रनाम अथवा योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है।
अगले दिन द्वादशी तिथि पर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान देकर व्रत का पारण किया जाता है।
10 जुलाई को व्रत करना शुभ
आचार्य के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 10 जुलाई की सुबह 8:16 बजे होगा और समापन 11 जुलाई की सुबह 5:22 बजे होगा। उदया तिथि के अभाव में इस वर्ष 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत करना अधिक शुभ माना गया है।