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    औरंगाबाद में भ्रष्टाचार का शिकार हुआ 8.85 करोड़ का चेकडैम‍! निर्माण पूरा होने से पहले ही दीवार में दरारें 

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 06:27 PM (IST)

    औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड में 8.85 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे चेकडैम की दीवार में निर्माण पूरा होने से पहले ही दरारें आ गई हैं, जिससे परियोजना की ...और पढ़ें

    पिपरा बगाही स्थित चेकडैम। फोटो जागरण

    पिपरा बगाही स्थित चेकडैम। फोटो जागरण

    HighLights

    1. 8.85 करोड़ के चेकडैम की दीवार में दरारें आईं।

    2. ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।

    3. उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और जवाबदेही की मांग की गई।

    संवाद सूत्र, अंबा (औरंगाबाद)। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर खेत तक सिंचाई का पानी के तहत कुटुंबा प्रखंड की बतरे नदी पर निर्माणाधीन चेकडैम परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगभग 8.85 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन चेकडैमों में से पिपरा बगाही स्थित चेकडैम की दाहिनी दीवारें निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही फट गई हैं।

    इस घटना ने निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और विभागीय निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा पिपरा बगाही, लभरी खुर्द और करकटा में तीन चेकडैमों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं पर कुल आठ करोड़ 85 लाख 40 हजार 323 रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

    पिपरा बगाही का निर्माण अंतिम चरण में है, लेकिन दीवार में आईं दरारें ने पूरी परियोजना की विश्वसनीयता को संदेह में डाल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दरार सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी ने क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में दरार को ठीक करने के बजाय उस पर सीमेंट का प्लास्टर कर मिट्टी डालकर छिपाने का प्रयास किया गया।

    गंभीर लापरवाही और संभावित अनियमितता का मामला

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और संभावित अनियमितता का मामला है। उनका सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभी तक नदी में पानी का बहाव शुरू नहीं हुआ है और चेकडैम पर जल का दबाव भी नहीं पड़ा है।

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    ऐसे में निर्माण के दौरान ही दीवार में दरारें आना भविष्य में इसकी मजबूती को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। बरसात के दौरान तेज जल प्रवाह का सामना यह संरचना किस तरह करेगी, यह बड़ा प्रश्न है।

    निर्माण स्थल के चयन को किसानों ने भी जताई आपत्ति

    निर्माण स्थल के चयन को लेकर भी किसानों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर चेकडैम बनाया जा रहा है, वहां से अपेक्षित क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने की संभावना कम है।

    किसानों का आरोप है कि योजना का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना है, लेकिन वर्तमान स्थल चयन उस लक्ष्य को पूरा करता नहीं दिख रहा। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की प्रयोगशाला जांच तथा संबंधित अधिकारियों और संवेदक की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना भविष्य में सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बन सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग इस मामले में पारदर्शी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करता है या इसे सामान्य तकनीकी खामी मानकर नजरअंदाज कर देता है।

    कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि दीवार नहीं बल्कि प्लास्टर का पन्ना फटा है। विभागीय सहायक अभियंता से इसकी जानकारी ली गई है।

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