औरंगाबाद के प्रकाश बने लेफ्टिनेंट; सेना के जवान से अफसर बनने की लिखी प्रेरक कहानी
औरंगाबाद के करहरा गांव के प्रकाश ने सेना में जवान से लेफ्टिनेंट बनकर अपने अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। उनका यह सफर युवाओं के लिए प्रेर ...और पढ़ें

मां के साथ लेफ्टिनेंट प्रकाश कुमार। फोटो : स्वजन
HighLights
प्रकाश ने सेना में जवान से लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया।
यह सफलता अथक परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।
उनका सफर युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के करहरा गांव निवासी अधिवक्ता बीरेंद्र सिंह के छोटे पुत्र प्रकाश ने अपने अथक परिश्रम, अनुशासन और अटूट इच्छाशक्ति के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है।
यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प के साथ किया गया प्रयास किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकता है। सेना में जवान के रूप में भर्ती होने से लेकर लेफ्टिनेंट बनने तक का उनका सफर संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत की मिसाल है।
प्रकाश की सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा करहरा गांव गौरवान्वित है। गांव में उनके अधिकारी बनने की खबर मिलते ही बधाई देने वालों का तांता लग गया।
देश सेवा का सपना लेकर शुरू की तैयारी
प्रकाश ने बताया कि उन्होंने देव स्थित सूर्य नारायण इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश सेवा का सपना संजोया।
बचपन से ही उन्होंने अपने पिता के संघर्षपूर्ण जीवन को करीब से देखा था। सीमित संसाधनों के बावजूद पिता ने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए बच्चों की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।
उन्होंने तय कर लिया था कि कठिन परिस्थितियां उनके लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनेंगी। सेना में भर्ती होने के लिए उन्होंने नियमित रूप से शारीरिक और लिखित परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
उनकी दिनचर्या पूरी तरह अनुशासित थी। सुबह दौड़ और शारीरिक अभ्यास से शुरुआत होती, दिनभर पढ़ाई करते और रात में फिर दौड़ एवं अभ्यास के साथ दिन समाप्त करते थे।
2019 में बने सेना के जवान
लगातार मेहनत का परिणाम वर्ष 2019 में मिला, जब प्रकाश भारतीय सेना में जवान के रूप में चयनित हुए। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली तैनाती सिक्किम में हुई।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। करीब दो वर्षों तक सेवा के दौरान उन्होंने सेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।
इसी दौरान उनके मन में अधिकारी बनने का लक्ष्य और मजबूत हुआ। उन्होंने महसूस किया कि यदि एक सैनिक पूरी लगन और मेहनत से तैयारी करे तो वह अधिकारी बनने का सपना भी पूरा कर सकता है।
चार वर्षों की कठिन तैयारी लाई सफलता
सेना की ड्यूटी निभाने के साथ-साथ प्रकाश ने अधिकारी बनने की तैयारी जारी रखी। सीमित समय के बावजूद उन्होंने पढ़ाई और शारीरिक अभ्यास में कोई कमी नहीं आने दी।
लगभग चार वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर वर्ष 2026 में उन्होंने लेफ्टिनेंट बनने का सपना साकार कर लिया।
उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
प्रकाश ने बेरोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे दूसरों की बातों में भटकने के बजाय अपना लक्ष्य तय करें और पूरी निष्ठा के साथ उसकी तैयारी करें।
उन्होंने कहा कि कठिनाइयां हर रास्ते में आती हैं, लेकिन धैर्य, अनुशासन और लगातार प्रयास करने वाले लोगों को सफलता अवश्य मिलती है।
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