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    बांका में ऑटो-ई-रिक्शा की मनमानी: यात्रियों को 15 किमी के लिए चुकाने पड़ रहे 40 रुपये

    Updated: Sun, 31 May 2026 03:56 AM (IST)

    धोरैया बाजार से बांका और अन्य जगहों के लिए नियमित बस सेवा के अभाव में ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमानी किराया वसूल रहे हैं। यात्रियों को 15 किलोमीटर के लिए ...और पढ़ें

    बांका में ऑटो की मनमानी। फोटो जागरण

    बांका में ऑटो की मनमानी। फोटो जागरण

    HighLights

    1. धोरैया में बस सेवा की कमी से यात्री परेशान।

    2. ऑटो-ई-रिक्शा 15 किमी के लिए 40 रुपये लेते हैं।

    3. बिना लाइसेंस वाले वाहनों से बस ऑपरेटरों को नुकसान।

    संवाद सूत्र, धोरैया (बांका)। धोरैया बाजार से बांका, पुनसिया, बौंसी और झारखंड के गोड्डा जाने के लिए नियमित बस सेवा का अभाव यात्रियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। सरकारी बसों की अनुपस्थिति ने ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी को बढ़ावा दिया है।

    धोरैया से पंजवारा और पुनसिया की दूरी केवल 15 किलोमीटर है, लेकिन यात्रियों से 40 रुपये तक किराया वसूला जा रहा है। इधर, फिर किराया बढ़ने के आसार से लोगों में मायूसी है।

    पप्पू यादव ने कहा कि सड़क की स्थिति में सुधार होने के बावजूद किराए में कोई नियंत्रण नहीं है। अक्सर किराए को लेकर यात्रियों और चालकों के बीच विवाद होते रहते हैं। कई बार कम किराया देने पर यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    बांका कोर्ट जाने वाले यात्रियों ने बताया कि धोरैया से पुनसिया होते हुए बांका पहुंचने में लगभग 100 रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा, दो स्थानों पर वाहन बदलने की आवश्यकता होती है, जिससे समय और धन की बर्बादी होती है। यात्रियों का आरोप है कि छोटी गाड़ियों के चालक अक्सर अभद्र व्यवहार करते हैं।

    धोरैया-पंजवारा और धोरैया-पुनसिया मार्गों पर बड़ी बसों का न चलना लोगों को छोटे वाहनों पर निर्भर बना रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई ऑटो और ई-रिक्शा नाबालिगों द्वारा चलाए जाते हैं, और दुर्घटना की स्थिति में चालक घायल यात्रियों को छोड़कर भाग जाते हैं। धोरैया से पंजवारा होते हुए गोड्डा की 30 किलोमीटर दूरी के लिए 80 रुपये किराया लिया जाता है।

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    वहीं, धोरैया से सन्हौला होते हुए भागलपुर मार्ग पर स्थिति बेहतर है, जहां 50 किलोमीटर के लिए 100 रुपये किराया निर्धारित है और सुबह से शाम तक बसों का संचालन होता है।

    बस कंडक्टरों का कहना है कि बिना लाइसेंस के सैकड़ों ऑटो और ई-रिक्शा चल रहे हैं, जिससे बसों को यात्री नहीं मिलते और आर्थिक नुकसान होता है।

    क्या कहते हैं कंडक्टर

    बस कंडक्टरों का कहना है कि धोरैया क्षेत्र में बिना लाइसेंस और आवश्यक कागजात के सैकड़ों ऑटो एवं ई-रिक्शा चल रहे हैं। छोटी गाड़ियों की अधिकता के कारण बड़ी बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिलते, जिससे बस मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    उनका कहना है कि डीजल की कीमत बढ़ने के बावजूद बसों का किराया नहीं बढ़ाया गया है, फिर भी यात्री छोटी गाड़ियों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं।

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