बांका के पैक्सों में बनेंगे 500 से 1000 टन क्षमता के आधुनिक गोदाम, प्रक्रिया शुरू
बांका जिले की प्राथमिक कृषि साख सहयोग समितियों (पैक्स) में किसानों की सुविधा के लिए 500 से 1000 टन क्षमता के आधुनिक गोदामों का निर्माण किया जाएगा। ...और पढ़ें
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HighLights
बांका के 26 पैक्सों में बनेंगे नए गोदाम।
500 से 1000 टन क्षमता के आधुनिक गोदाम।
किसानों के लिए अनाज भंडारण सुविधा बढ़ेगी।
संवाद सूत्र, बांका। जिला के प्राथमिक कृषि साख सहयोग समितियों (पैक्स) की अनाज भंडारण क्षमता में जल्द ही बड़ा इजाफा होने वाला है। किसानों की सुविधा और धान-गेहूं खरीद व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग ने कई पैक्सों में नए गोदाम निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर 26 पैक्सों में नए गोदाम निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें वे समितियां शामिल हैं, जिनके पास वर्तमान में कोई गोदाम नहीं है अथवा जिनकी भंडारण क्षमता 100 टन से भी कम है। हालांकि यह संख्या 50 के पार थी, लेकिन इसमें से कई डिफाल्टर पैक्स होने के कारण उन्हें गोदाम योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।
जानकारी के अनुसार चयनित समितियों में 500 या एक हजार टन क्षमता वाले आधुनिक गोदामों का निर्माण कराया जाएगा। इससे न केवल अनाज भंडारण की समस्या का समाधान होगा, बल्कि किसानों से खरीदे गए धान और गेहूं के सुरक्षित रखरखाव में भी सुविधा मिलेगी।
जिला सहकारिता पदाधिकारी प्रफुल्ला चंद्र सिन्हा ने बताया कि कुछ समितियों में गोदाम निर्माण की स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। वहीं जिन समितियों के पास गोदाम उपलब्ध नहीं है, उनके अध्यक्षों से प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के माध्यम से प्रस्ताव मांगा गया था।
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प्राप्त प्रस्तावों को विभाग को भेज दिया गया है और स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। बताया कि प्राथमिकता के आधार पर सरकारी भूमि पर गोदामों का निर्माण कराया जाएगा।
जहां सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होगी, वहां निजी भूमि का एकारनामा करकर गोदाम का निर्माण कराया जाएगा। ऐसी स्थिति में भूमि मालिकों को समिति द्वारा निर्धारित दर के अनुसार किराया भुगतान किया जाएगा।
कई समिति के पास नहीं है भंडारण क्षमता
दरअसल, जिले में धान और गेहूं अधिप्राप्ति के दौरान गोदाम की कमी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। कई समितियों को किसानों से खरीदा गया अनाज खुले स्थानों या अस्थायी व्यवस्था के तहत रखना पड़ता है। बारिश अथवा अन्य प्राकृतिक कारणों से कई बार अनाज को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इससे न केवल पैक्सों को आर्थिक क्षति होती है, बल्कि किसानों की उपज के संरक्षण पर भी असर पड़ता है।
नए गोदामों के निर्माण के बाद अनाज भंडारण की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी। साथ ही पैक्सों को अनाज सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा। किसानों को भी अपनी उपज बेचने के बाद बेहतर प्रबंधन का लाभ मिलेगा।
जिन समितियों के पास अनाज भंडारण के लिए गोदाम नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए गोदाम का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए समितियों से प्रस्ताव मांगा गया था और उसे विभाग को भेजा गया है।
प्रफुल्ल चंद्र सिन्हा, जिला सहकारिता पदाधिकारी