भागलपुर से चीन, लाओस और वियतनाम तक फैला 'कन्ना किताब' का जाल; अक्सर होता है यौन शक्ति बढ़ाने वाले इस धंधे में जंग
भागलपुर में 'कन्ना किताब' नामक अवैध कारोबार जानवरों की चर्बी से बनी एक थैली से जुड़ा है, जिसकी चीन, लाओस और वियतनाम में यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं और ...और पढ़ें

रहमत कुरैशी और मिंटू कुरैशी। बड़े जानवरों के आंतरिक अंगों से तैयार होता है 'कन्ना किताब'; शक्तिवर्धक दवाओं और प्रसाधनों में होता है भारी इस्तेमाल।
HighLights
'कन्ना किताब' जानवरों की चर्बी से बनी अवैध थैली का व्यापार।
चीन, लाओस, वियतनाम में यौन शक्ति दवाओं हेतु भारी मांग।
भागलपुर में इस धंधे से खूनी गैंगवार और कई हत्याएं।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर के अंदेरूनी इलाकों में 'कन्ना किताब' का नाम सुनते ही आम लोगों के बीच एक खौफ और कौतूहल का माहौल बन जाता है। ऊपर से सामान्य दिखने वाला यह शब्द वास्तव में एक ऐसे अवैध और महंगे अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ा है, जिसका सीधा तार भारत से होकर चीन, लाओस और वियतनाम जैसे एशियाई देशों तक फैला हुआ है।
आखिर क्या है 'कन्ना किताब'?
'कन्ना किताब' दरअसल बड़े जानवरों के शरीर के अंदर मौजूद चर्बी से युक्त एक विशेष थैलीनुमा भाग से तैयार किया जाता है। जानवरों की कटाई के बाद इस बड़े हिस्से को निकालकर सबसे पहले धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद जब इसे मोड़ा जाता है, तो यह 4 से 5 परतों वाली किसी किताब की शक्ल ले लेता है। इसी विशिष्ट बनावट के कारण स्थानीय भाषा में इसे 'कन्ना किताब' का नाम दिया गया है।
चीन, लाओस और वियतनाम में भारी मांग
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस उत्पाद की बेहद भारी मांग है। भागलपुर में तैयार होने के बाद इसे कोलकाता के बड़े मांस और पशु उप-उत्पाद कारोबारियों तक पहुंचाया जाता है। वहां से शिपमेंट के जरिए इसे चीन, लाओस और वियतनाम भेजा जाता है। इन देशों में पारंपरिक और आधुनिक शोध के आधार पर इसका उपयोग मुख्य रूप से यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं (Aphrodisiacs), विशेष हेल्थ सप्लीमेंट्स और उच्च गुणवत्ता वाले सौंदर्य प्रसाधनों (Cosmetics) को बनाने में किया जाता है। इसी अत्यधिक मांग के कारण इसमें भारी मुनाफा होता है।
फेकू मियां से शुरू हुआ खूनी इतिहास
भागलपुर में इस कारोबार का जाल सबसे पहले बबरगंज मोगलपुरा के कुख्यात फेकू मियां ने फैलाया था। उसने कोलकाता के कारोबारियों से सांठगांठ कर इसे विदेश भेजने का नेटवर्क तैयार किया था। हालांकि, करोड़ों के इस मुनाफे वाले धंधे में जल्द ही वर्चस्व की खूनी जंग शुरू हो गई:
खबरें और भी
9 दिसंबर 2010: सरगना मुहम्मद फकरुद्दीन उर्फ फेकू मियां की उसके घर के सामने ही निहारी पीते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
28 फरवरी 2023: इसी धंधे पर कब्जे को लेकर कल्लू मियां की हत्या कर दी गई, जिसमें कई नामी अपराधी नामजद हुए।
आज भी भागलपुर के मोजाहिदपुर, बबरगंज और आसपास के इलाकों में होने वाले आपराधिक टकरावों और गैंगवार के पीछे 'कन्ना किताब' का यह काला और खूनी कारोबार ही मुख्य वजह बना हुआ है।