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    सिल्क सिटी का विस्तार: 359 वर्ग KM क्षेत्र में बनेगा 'ग्रेटर भागलपुर', 7 चरणों में पूरा होगा मास्टर प्लान

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 09:49 PM (IST)

    भागलपुर को अगले 20 वर्षों की जरूरतों के अनुरूप "ग्रेटर भागलपुर" और "सैटेलाइट टाउन" के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान का काम तेज हो गया है। ...और पढ़ें

    ग्रेटर भागलपुर के विकास का खाका तैयार, मास्टर प्लान में बेस मैपिंग का कार्य जोरों पर (AI Generated Image)

    ग्रेटर भागलपुर के विकास का खाका तैयार, मास्टर प्लान में बेस मैपिंग का कार्य जोरों पर (AI Generated Image)

    HighLights

    1. मास्टर प्लान के तहत ग्रेटर भागलपुर का विकास कार्य तेज।

    2. सोशल सर्वे के बाद बेस मैपिंग का कार्य प्रगति पर है।

    3. शहर के विस्तार और सुविधाओं की रूपरेखा बेस मैपिंग से तय।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सिल्क सिटी को अगले 20 वर्षों की जरूरतों के अनुरूप "ग्रेटर भागलपुर" और "सैटेलाइट टाउन" के रूप में विकसित करने की दिशा में मास्टर प्लान का काम तेज हो गया है। विभाग द्वारा नियुक्त एजेंसी ने सोशल एंड इकोनॉमिक सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है।

    अब दूसरे चरण में बेस मैपिंग का कार्य चल रहा है। इसी बेस मैपिंग के आधार पर शहर के विस्तार, नई सड़कों, सीवरेज-ड्रेनेज नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय कालोनियों, पार्क, ग्रीन जोन और अन्य नागरिक सुविधाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस कार्य की प्रगति की समीक्षा 10 अगस्त को निगम प्रशासन के माध्यम से किया जाएगा।

    भागलपुर आयोजना क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 359 वर्ग किलोमीटर कर दिया है। विस्तारित क्षेत्र में 384 राजस्व गांव, तीन शहरी निकाय और चार सेंसस टाउन शामिल किए गए हैं।

    नई सीमा के अनुसार उत्तर में नारायणपुर और नाथनगर, दक्षिण में गोराडीह, जगदीशपुर और शाहकुंड, पूर्व में सबौर तथा पश्चिम में सुल्तानगंज तक का इलाका मास्टर प्लान का हिस्सा है। इस विस्तारित क्षेत्र के विकास के लिए वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

    क्या है बेस मैपिंग, क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?

    सोशल सर्वे पूरा होने के बाद अब बेस मैपिंग का कार्य चल रहा है। मास्टर प्लान में बेस मैपिंग उस मूल और सटीक नक्शे को कहा जाता है, जिसके आधार पर पूरे शहर के विकास की योजना बनाई जाती है। इसमें सड़क, नाला, ड्रेनेज, सीवरेज, जल निकाय, रेलवे लाइन, सरकारी भवन, बिजली-पानी की व्यवस्था, खाली भूमि, मौजूदा कालोनियां और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाता है।

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    इसी नक्शे के आधार पर तय होगा कि भविष्य में कहां नई सड़क बनेगी, किस इलाके में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा, कहां आवासीय कालोनियां बसेंगी, किन क्षेत्रों को ग्रीन जोन बनाया जाएगा तथा अस्पताल, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं कहां विकसित होंगी। यही कारण है कि बेस मैपिंग को मास्टर प्लान की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है।

    सात चरणों में तैयार होगा मास्टर प्लान

    मास्टर प्लान का कार्य सात चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहला चरण वर्ष 2023 में इंसेप्शन रिपोर्ट तैयार करने का था, जिसमें आयोजना क्षेत्र, उद्देश्य और भागलपुर की विशेषताओं का अध्ययन किया गया।

    दूसरे चरण में सैटेलाइट बेस मैप तैयार किया गया और 40 बिंदुओं पर सर्वे कर सड़क, नाला, ड्रेनेज, सीवरेज, पेयजल, रोशनी सहित आधारभूत सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया। अब विस्तारित क्षेत्र को शामिल करते हुए बेस मैपिंग का कार्य किया जा रहा है।

    तीसरे चरण में बेसलाइन डाटा तैयार होगा, जिसमें खाली प्लाट, आवासीय कालोनियां, भविष्य के औद्योगिक क्षेत्र, पार्क और ग्रीन जोन के लिए भूमि चिन्हित की जाएगी।

    चौथे चरण में जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित विभाग सर्वे रिपोर्ट का परीक्षण कर संभावित समस्याओं का समाधान तय करेंगे। पांचवें चरण में ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार कर उसे आम जनता के लिए सार्वजनिक किया जाएगा और सुझाव मांगे जाएंगे।

    छठे चरण में प्राप्त सुझावों के आधार पर संशोधन कर अंतिम मसौदा तैयार होगा। सातवें और अंतिम चरण में पूरे योजना क्षेत्र को अलग-अलग जोन और सेक्टर में बांटते हुए सड़कों की चौड़ाई, नालों का स्वरूप, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र, मल्टीलेवल भवन, पार्क और अन्य विकास कार्यों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव राज्य कैबिनेट को भेजा जाएगा।

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