अब अजगैवीनाथ धाम के नाम से जाना जाएगा सुल्तानगंज, विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के उद्घाटन में बोले CM सम्राट
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रावणी मेले का उद्घाटन किया और सुल्तानगंज का नाम अजगैवीनाथ धाम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कांवरियों की सेवा और क्षेत्र ...और पढ़ें
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। फोटो X/samrat4bjp
HighLights
सुल्तानगंज का नाम अजगैवीनाथ धाम करने का सुझाव।
श्रावणी मेले का उद्घाटन, कांवरियों की सेवा पर जोर।
क्षेत्र में पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की घोषणा।
जागरण संवाददाता, अजगैवीनाथ धाम (भागलपुर)। श्रावणी मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांवरियों की सेवा से लेकर सुल्तानगंज और आसपास के क्षेत्र के विकास का खाका सामने रखा।
उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला इस इलाके के लिए सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक पर्व है। भागलपुर, मुंगेर और बांका के लोग साल भर सावन का इंतजार करते हैं, ताकि देश-दुनिया से बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाने आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत और सेवा कर सकें।
जनता अपनाएगी तो प्रशासन भी लिखने लगेगा
उन्होंने बाबा अजगैवी नाथ के चरणों में प्रणाम करते हुए बिहार की समृद्धि और विकास के लिए भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती का आशीर्वाद मांगा। लोगों को सुल्तानगंज का नाम अजगैवीनाथ धाम लिखने के लिए कहा।
सुल्तानगंज का नाम अजगैवी नाथ नगर करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम बदलने के लिए किसी का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। लोग अभी से अजगैवीनाथ धाम लिखना शुरू कर दें। यह बाबा अजगैवी नाथ की नगरी है। जब लोग इस नाम को अपनाएंगे तो प्रशासन भी इसे लिखना शुरू कर देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, पर्यटन, पथ निर्माण, जल संसाधन और पीएचईडी समेत विभिन्न विभागों की टीमें लगी हुई हैं। वह तारापुर से सुल्तानगंज आते समय रास्ते में विभागों की तैयारियां देखते हुए आए हैं। हालांकि, सरकारी व्यवस्था से कहीं बढ़कर इस इलाके के लोग कांवरियों की सेवा में जुटते हैं।
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कई देशों के लोग पहुंचते हैं अजगैवीनाथ धाम
सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सेवा यहां की पुरानी परंपरा है। कांवर यात्रा को सामाजिक समानता का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में शायद ही कहीं एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोग एक जैसा वस्त्र पहनकर एक ही उद्देश्य से यात्रा करते हों।
कांवरिये अजगैबीनाथ में उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाते हैं और करीब 100 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। साढ़े तीन से साढ़े चार दिन की यात्रा में वस्त्र एक, बोली ‘बोल बम’ और लक्ष्य भी एक होता है।
उन्होंने कहा कि बचपन से देखते आए हैं कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका समेत कई देशों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने अजगैवीनाथ मंदिर और उत्तरवाहिनी गंगा के घाटों को विकसित करने का भरोसा भी दिया।
हरिद्वार की तर्ज पर किया जा रहा विकास
CM ने कहा कि मंदिर के चारों तरफ बेहतर व्यवस्था करने की मांग लोगों ने की है। हरिद्वार की तर्ज पर उत्तरवाहिनी गंगा के दोनों किनारों पर घाट विकसित करने और जल प्रवाह की बेहतर व्यवस्था करने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुंगेर से भागलपुर तक करीब 83 किलोमीटर गंगा पथ बनाने की योजना पर भी काम हो रहा है। गंगा किनारे बांध और सड़क के साथ पर्यटन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
अगवानी-सुल्तानगंज पुल को लेकर उन्होंने कहा कि हाल में वह अगवानी घाट गए थे। निर्माण एजेंसी ने लिखित रूप से दिया है कि 31 दिसंबर 2027 से पहले हर हाल में पुल चालू कर दिया जाएगा। इसका पूरा सुपर स्ट्रक्चर बदला जाना है।
पर्यटन का बनेगा केंद्र
मुख्यमंत्री ने डाल्फिन पर्यटन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक गंगा में डाल्फिन देखने का आनंद ले सकें। अजगैवी नाथ से अगवानी घाट तक रोपवे की योजना का भी उन्होंने जिक्र किया और कहा कि आने वाले समय में यह इलाका पर्यटन के बड़े आकर्षण के रूप में उभरेगा।
क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि अजगैवीनाथ एयरपोर्ट एक रनवे वाला नहीं, बल्कि दो रनवे वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। अजगैवी नाथ धाम से देवघर तक फोरलेन सड़क का निर्माण भी बरसात समाप्त होते ही शुरू कराने की बात कही।
तारापुर-असरगंज होकर देवघर के लिए अलग अलाइनमेंट पर भी काम होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे इलाके को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।
नई परियोजनाओं से विकसित होगा भागलपुर
मुख्यमंत्री ने गंगा के दोनों ओर कृषि की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस पार (अगुवानी - परबत्ता) मक्का और केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है तो इस पार धान का उत्पादन होता है।
उन्होंने कहा कि भागलपुर का कतरनी चावल अपनी खुशबू के लिए अलग पहचान रखता है। सुल्तानगंज-अजगैबीनाथ के पास नाथनगर क्षेत्र में ‘विक्रमशिला’ और बरियारपुर-मुंगेर के बीच ‘अंग’ के नाम से नई टाउनशिप बसाने की दिशा में भी काम शुरू किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में चल रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन 211 प्रखंडों में डिग्री कालेज नहीं थे, वहां कालेज खोलने का काम शुरू किया गया है।
युवाओं के लिए किया जा रहा काम
बच्चों को नीट और जेईई की तैयारी के लिए बाहर नहीं जाना पड़े, इसके लिए 551 स्थानों पर माडल स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। यहां विद्यार्थी अपने गांव और प्रखंड में रहकर लाइव क्लास कर सकेंगे। ऑनलाइन शिक्षकों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
रोजगार को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में बिहार में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने के लिए व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में रेलवे और सड़कों का विस्तार हो रहा है। इसका लाभ सुल्तानगंज समेत पूरे क्षेत्र को मिलेगा।
विधायक पर ली चुटकी
मुख्यमंत्री ने स्थानीय विधायक की मांगों का जिक्र करते हुए हल्के अंदाज में कहा कि उनकी मांगों की सूची काफी लंबी रहती है। कहते हैं कुछ नहीं मांगेंगे, लेकिन मंच पर आते ही साल भर की मांग पूरी कराते रहते हैं। उन्होंने शाहकुंड आने और रजौन को जोड़ने वाले पुल का शिलान्यास करने की बात भी कही।
समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया और क्षेत्र से जुड़ी लिखित मांगों को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। इसके बाद पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘बाबा अजगैबीनाथ की जय’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज उठा।