बिहार के लाल का साउथ अमेरिका में डंका! विदेशियों को सिखा रहे शास्त्रीय संगीत; भारत ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
भागलपुर के डॉ. आशीष कुमार मिश्रा दक्षिण अमेरिकी देश गयाना में भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति का प्रचार कर रहे हैं। भारत सरकार द्वारा नियुक्त, वे व ...और पढ़ें

युवा शास्त्रीय गायक डॉ. आशीष कुमार। फाइल फोटो
HighLights
डॉ. आशीष कुमार मिश्रा गयाना में भारतीय संगीत का प्रसार कर रहे।
आईसीसीआर ने उन्हें 18 माह के लिए नियुक्त किया है।
विदेशी छात्र भारतीय रागदारी संगीत और गुरु-शिष्य परंपरा सीख रहे।
परिमल सिंह, भागलपुर। साउथ अमेरिका में इन दिनों भागलपुर की शास्त्रीय संगीत परंपरा की तान गूंज रही है। शहर के प्रतिष्ठित संगीत परिवार से जुड़े बनारस घराने के युवा शास्त्रीय गायक डॉ. आशीष कुमार मिश्रा दक्षिण अमेरिकी देश गयाना में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
भारत सरकार के स्वायत्त निकाय भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आइसीसीआर) ने उन्हें 18 माह के लिए जार्जटाउन स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षण और उसके प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी है।
उनके मार्गदर्शन में विदेशी विद्यार्थी भारतीय रागदारी संगीत, गुरु-शिष्य परंपरा और पारंपरिक गायन शैली सीख रहे हैं। आशीष जार्जटाउन में बच्चों, युवाओं और संगीत प्रेमियों को राग, बंदिश और गायन की बारीकियां सिखा रहे हैं।
भारतीय संगीत के प्रति वहां बढ़ती रुचि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती दे रही है। देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दे चुके डॉ. आशीष आज साउथ अमेरिका में भारतीय शास्त्रीय संगीत के सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभा रहे हैं। यह कलाकार अपनी साधना, प्रतिभा और सामाजिक प्रतिबद्धता के बल पर सात समंदर पार भारतीय संगीत की परंपरा को नए श्रोताओं तक पहुंचा रहा है।
विरासत में मिला संगीत का संस्कार
आशीष के छोटे भाई तबलावादक ऋषि कुमार मिश्रा बताते हैं कि बड़े भाई को संगीत की विरासत परिवार से मिली है। दादा पंडित गणेश प्रसाद मिश्र और पिता पंडित हनुमान शरण मिश्र बिहार के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक रहे हैं।
प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने भागलपुर में संगीताचार्य पंडित पूनम लाल मिश्र से प्राप्त की। इसके बाद वाराणसी में बनारस घराने के संगीताचार्य पंडित राजेश्वर प्रसाद मिश्र और पंडित मोहन लाल मिश्र के सान्निध्य में वर्षों की साधना कर शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट पहचान बनाई।
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संगीत को बना रहे सामाजिक बदलाव का माध्यम
ऋषि के मुताबिक मंचीय प्रस्तुतियों के साथ आशीष सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े हैं। वे वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क संगीत शिक्षा देकर उनकी प्रतिभा निखार रहे हैं।
वे वाराणसी केंद्रीय कारागार में करीब दस वर्षों से बंदियों को संगीत का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके प्रयासों से कई बंदियों ने रिहाई के बाद संगीत को ही आजीविका बनाकर सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत की है।
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