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    बिहार में गरीबों के मसीहा बने डॉ केडिया, सरकारी नौकरी छोड़ करते हैं फ्री इलाज; जेब से देते हैं दवा-किराया खर्च

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 03:49 PM (IST)

    डॉ. पी. राम केडिया भागलपुर में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए मसीहा बने हुए हैं, जो मुफ्त इलाज, दवाएं और यहां तक कि घर लौटने का किराया भी देते हैं। ...और पढ़ें

    डॉ. पी. राम केडिया। फोटो जागरण

    डॉ. पी. राम केडिया। फोटो जागरण

    HighLights

    1. गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाएं प्रदान करते हैं।

    2. कोरोना काल में भी क्लीनिक खुला रखा, कम फीस ली।

    3. अपनी जेब से मरीजों को घर लौटने का किराया भी देते हैं।

    नवनीत मिश्र, भागलपुर। आज के दौर में जहां इलाज महंगा होता जा रहा है और डॉक्टरों की फीस आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। वहीं, भागलपुर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पी. राम केडिया गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं।

    सेवा भाव और मानवता की मिसाल बने डॉ. केडिया हर दिन सैकड़ों मरीजों का इलाज करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या कोसी और सीमांचल क्षेत्र से आने वाले मरीजों की होती है।

    डॉ. केडिया की सबसे बड़ी पहचान उनका सेवा भाव है। इलाज के लिए पैसे नहीं होने पर वे गरीब मरीजों का मुफ्त उपचार करते हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर अपनी जेब से दवा खरीदकर भी देते हैं।

    कई बार जब मरीजों के पास घर लौटने का किराया तक नहीं होता, तो वे खुद भाड़ा देकर उन्हें विदा करते हैं। यही वजह है कि उनके मरीज उन्हें भगवान का दर्जा देते हैं।

    कोरोना के दौरान बने मसीहा

    कोरोना काल में जब निजी क्लीनिक और अस्पताल बंद हो गए थे और मरीज इलाज के लिए भटक रहे थे, तब भी डॉ. केडिया ने अपनी क्लीनिक खुली रखी। कोरोना संक्रमित मरीजों का नाम सुनते ही जहां कई डॉक्टर दूरी बना रहे थे, वहीं डॉ. केडिया ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ उनका इलाज किया।

    लॉकडाउन के दौरान भी उन्होंने अपनी फीस नहीं बढ़ाई। आज भी उनकी फीस मात्र दो सौ रुपये है, जबकि शहर में अधिकांश फिजिशियन आठ सौ रुपये या उससे अधिक लेते हैं।

    जनसेवा में खुद किया समर्पित 

    डॉ. केडिया केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं। वे गरीबों के लिए भंडारा आयोजित करते हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों को भरपेट भोजन कराया जाता है। यह परंपरा वर्षों से जारी है और समाज के कमजोर वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

    उनकी सोच और सेवा भावना का असर उनके परिवार पर भी दिखता है। उनकी तीन बेटियां डॉक्टर हैं और एक इंजीनियर, जबकि बेटा डॉक्टर की पढ़ाई कर रहा है।

    कोरोना काल में जब उनकी दो बेटियों ने सरकारी नौकरी छोड़ने की बात कही थी, तब डॉ. केडिया ने उन्हें मरीजों की सेवा के लिए प्रेरित किया और कहा कि डॉक्टर का धर्म मरीजों का इलाज करना है।

    दूर-दूर से आते हैं मरीज

    आज उनकी बेटियां भी अपने पिता के बताए रास्ते पर चल रहीं हैं। मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापक रहे डॉ. केडिया ने 28 जनवरी 2020 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। इससे पहले वे पूर्णिया के अमौर रेफरल अस्पताल में मरीजों से इच्छा अनुसार फीस लेते थे। क्लीनिक में एक डिब्बा रखा रहता था, जिसमें मरीज अपनी क्षमता के अनुसार पैसे डालते थे।

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    यही सादगी और सेवा भाव आज भी उनकी पहचान है। अमौर और इससे आसपास के मरीज पूर्णिया के चिकित्सक को नहीं दिखाकर सौ किलोमीटर दूर डॉ. केडिया से दिखाने भागलपुर आते हैं। उनके द्वारा जगह-जगह निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयेजन किया जाता है। फ्री इलाज के साथ निशुल्क दवाएं दी जाती हैं।

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