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    Guru Purnima : गुरु पूर्णिमा पूजन की सामग्री और स्टेप-बाय-स्टेप विधि, शुभ मुहूर्त पर दें ध्यान; मिलेगा व‍िशेष फल

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 02:28 PM (IST)

    आचार्य पंकज अथर्व ने गुरु पूर्णिमा पर घर और आश्रमों में होने वाले पूजन विधान की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने पूजन सामग्री, विधि और गुरु की अनुपस्थि ...और पढ़ें

    Guru Purnima: घर पर करें शास्त्रोक्त गुरु पूजन, आचार्य पंकज अथर्व ने बताया तांबूल अर्पण का महत्व व सही तरीका

    Guru Purnima: घर पर करें शास्त्रोक्त गुरु पूजन, आचार्य पंकज अथर्व ने बताया तांबूल अर्पण का महत्व व सही तरीका

    HighLights

    1. गुरु पूर्णिमा पूजन का मुख्य उद्देश्य गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।

    2. पूजन सामग्री में पवित्र जल, पंचामृत, पीले पुष्प और वस्त्र शामिल।

    3. गुरु की अनुपस्थिति में पादुका या चित्र पूजन फलदायी होता है।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। श्री श्री 1008 लक्ष्मी पीतांबरा महायज्ञ की तैयारियों के सिलसिले में भागलपुर पहुंचे प्रसिद्ध तांत्रिक क्रियायोगी एवं ज्योतिषाचार्य स्मार्त परमहंस आचार्य पंकज अथर्व ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर घर और आश्रमों में किए जाने वाले शास्त्रोक्त पूजन विधान की संपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि गुरु पूजन का मुख्य उद्देश्य गुरुदेव के प्रति परम कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके दिखाए सत्य, धर्म व सदाचार के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लेना है।

    पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट

    गुरु पूजन के लिए आवश्यक सामग्री:

    • पवित्र जल व द्रव्य: गंगाजल, शुद्ध जल, पंचामृत, कच्चा दूध और शुद्ध देशी घी।

    • अक्षत व चंदन: रोली, अष्टगंध, पीला चंदन और साबुत अक्षत।

    • पुष्प व वस्त्र: पीले या सुगंधित ताजा पुष्प, माला और नया पीला/श्वेत वस्त्र।

    • अन्य सामग्री: धूप, दीप, फल, मिष्ठान, तांबूल (पान का पत्ता) और सामर्थ्यानुसार दक्षिणा।

    गुरु पूजन विधि

    • 1. स्नान एवं संकल्प: प्रातःकाल नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर गुरुदेव का ध्यान करते हुए सत्य, धर्म और साधना के मार्ग पर चलने का मन से संकल्प लें।

    • 2. प्रतिमा या पादुका स्थापना: एक पवित्र चौकी पर पीला या श्वेत वस्त्र बिछाएं। उस पर गुरुदेव का चित्र, प्रतिमा अथवा गुरु-पादुका को स्थापित करें और सामने देशी घी का दीप प्रज्ज्वलित करें।

  • 3. अभिषेक एवं तिलक: गंगाजल व पंचामृत से गुरु प्रतिमा या पादुका का प्रतीकात्मक प्रोक्षण व अभिषेक करें। तत्पश्चात उन्हें रोली, चंदन, अष्टगंध और अक्षत का तिलक लगाएं।

  • 4. पुष्प व तांबूल अर्पण: गुरु चरणों में पीले पुष्प अर्पित करें। तांबूल (पान) अर्पित करना विशेष सम्मान, वाणी की मधुरता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

  • 5. आरती एवं दक्षिणा: गुरु पादुका का स्पर्श कर भावपूर्वक प्रणाम करें। सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र व दक्षिणा अर्पित कर गुरु आरती गाएं और अंत में सभी में प्रसाद का वितरण करें।

  • गुरुदेव की अनुपस्थिति में ऐसे प्राप्त करें पूर्ण फल

    आचार्य पंकज अथर्व ने बताया कि यदि गुरुदेव सशरीर उपस्थित न हों या किसी कारणवश आप उनके पास न पहुंच सकें, तो घर पर ही उनकी पादुका या चित्र का विधानपूर्वक पूजन करें। इसके अलावा किसी योग्य आचार्य, संत, शिक्षक अथवा जरूरतमंद व्यक्ति की सेवा करना और उन्हें दान देना भी गुरु-सेवा के समान ही फलदायी और पुण्यकारी होता है।

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