विक्रमशिला पुल टूटने पर नाव से इलाज को आए भागलपुर, अब मौत के बाद भी बोट बनी सहारा
विक्रमशिला सेतु पथ ध्वस्त होने से नवगछिया और भागलपुर के बीच आवागमन बाधित है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ...और पढ़ें
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शव को ले जाते परिजन। (जागरण)
HighLights
विक्रमशिला सेतु पथ ध्वस्त, नवगछिया-भागलपुर आवागमन में गंभीर बाधा।
मरीजों को इलाज हेतु गंगा नदी पार करने नाव का सहारा।
मृतक के शव को नाव से ले जाने में पुलिस ने की मदद।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु पथ के ध्वस्त होने का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ने लगा है। सबसे अधिक परेशानी नवगछिया अनुमंडल के मरीजों और उनके स्वजन को झेलनी पड़ रही है।
इलाज के लिए मरीजों को गंगा नदी पार कर नाव के सहारे भागलपुर आना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इलाज के दौरान मौत होने पर पार्थिव शरीर को भी वापस नवगछिया ले जाने के लिए नाव ही एकमात्र विकल्प बचा है।
शनिवार की शाम बरारी पुल घाट पर ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला। नवगछिया के निवासी सुरेश शर्मा का भागलपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था।
स्वजन एंबुलेंस से उनका पार्थिव शरीर लेकर बरारी पुल घाट पहुंचे, लेकिन तब तक शाम के 5.40 बज चुके थे। घाट पर नाव परिचालन का निर्धारित समय शाम पांच बजे तक ही है।
ऐसे में स्वजनों को आशंका होने लगी कि अब शव को नवगछिया ले जाना मुश्किल हो जाएगा और रातभर घाट पर ही रुकना पड़ सकता है। पार्थिव शरीर के साथ मौजूद स्वजन चिंता और असहायता की स्थिति में थे।
पुलिस ने की सहायता
इसी दौरान घाट पर तैनात पुलिस कर्मियों और दंडाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मानवता का परिचय दिया। अधिकारियों ने विशेष पहल कर शव को नदी पार पहुंचाने के लिए नाव की व्यवस्था कराई। इसके बाद पार्थिव शरीर को नाव पर सवार कर नवगछिया की ओर रवाना किया गया।
विक्रमशिला सेतु पथ ध्वस्त होने के बाद से नवगछिया और भागलपुर के बीच आवागमन की समस्या गंभीर हो गई है। खासकर गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।
कई मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, आपात स्थिति में नाव पर निर्भरता लोगों की परेशानी और बढ़ा रही है। हालांकि, पुल घाट पर प्रशासन ने एंबुलेंस की व्यवस्था की है। जिससे अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।