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    भोजपुर में झींगा और मोती पालन से बढ़ेगी किसानों की आय, ट्रेनिंग के साथ 60 प्रतिशत सब्सिडी भी देगी सरकार

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 03:48 PM (IST)

    भोजपुर जिले में मत्स्य विभाग झींगा और मोती पालन को बढ़ावा दे रहा है ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके। योजना के तहत चयनित किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण के ...और पढ़ें

    एआई जनरेटेड फोटो

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    HighLights

    1. भोजपुर में झींगा और मोती पालन को बढ़ावा।

    2. किसानों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण और 60% अनुदान।

    3. जिले में बढ़ेगी किसानों की आय, रोजगार के अवसर।

    जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले में पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ अब झींगा और मोती पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए जिला मत्स्य विभाग ने पहल शुरू कर दी है।

    योजना के प्रथम चरण में किसानों का चयन किया जाएगा। चयनित किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के साथ सरकारी अनुदान का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा।

    जिला मत्स्य पदाधिकारी पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि पहले चरण में एक दर्जन किसानों का चयन झींगा पालन के लिए और छह किसानों का चयन मोती पालन के लिए किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद किसानों को योजनाओं का लाभ देकर उत्पादन शुरू कराया जाएगा।

    कैसे मिलेगा योजना का लाभ? 

    मत्स्य विभाग ने बताया कि झींगा पालन के लिए करीब 11 कट्ठा भूमि की आवश्यकता होगी। एक यूनिट पर लगभग 1.10 लाख रुपये की लागत आएगी, जिसमें सरकार की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

    शेष राशि लाभार्थी किसान को वहन करनी होगी। वहीं, मोती पालन के लिए एक यूनिट की लागत 2.22 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें भी विभाग की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

    मोती पालन के लिए तालाबों में वैज्ञानिक विधि से सीप तैयार कर उनमें मोती विकसित किए जाएंगे। इससे किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में अधिक आय मिलने की संभावना है।

    ट्रेनिंग के साथ सब्सिडी भी 

    जिले में दो यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं झींगा पालन के लिए तीन यूनिट लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि चयनित किसानों को पहले आधुनिक तकनीक का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    झींगा और मोती पालन के लिए जरूरी संसाधन और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसान बेहतर उत्पादन कर सकें। विभाग का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और मत्स्य पालन के क्षेत्र में नए विकल्प उपलब्ध कराना है। झींगा और मोती पालन को बढ़ावा मिलने से जिले में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

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