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    बक्सर में वाहनों की सुरक्षा मानकों की खुली पोल, मैनुअल जांच कर दिया जा रहा प्रमाणपत्र; मॉडर्न फिटनेस मशीनों का अभाव

    Updated: Fri, 01 May 2026 12:34 PM (IST)

    बक्सर जिले में अधिकृत फिटनेस सेंटर के अभाव में वाहनों की मैनुअल जांच कर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। इससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, बक्सर। जिले में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए एक भी अधिकृत फिटनेस सेंटर नहीं होने के बावजूद परिवहन विभाग मैनुअल जांच के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर रहा है। इससे वाहनों की सुरक्षा मानकों की पोल खुल गई है और सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

    जिला में आधुनिक फिटनेस जांच मशीनों और आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। ऐसे में 5 मार्च से बहाल की गई फिटनेस प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति और राजस्व बढ़ाने तक सीमित होकर रह गई है।

    वाहनों की ब्रेक, लाइट, इंजन, चेसिस और प्रदूषण नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जांच बिना किसी आधुनिक उपकरण के की जा रही है। कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने सख्ती दिखाते हुए जिले के सभी वाहनों की फिटनेस जांच के लिए सासाराम को निर्धारित किया था।

    नियम के अनुसार, वाहन मालिकों को वाहन लेकर सासाराम जाना होता। इस फैसले का स्थानीय वाहन स्वामियों ने पुरजोर विरोध किया। उनका कहना था कि दूसरे जिले जाना समय और धन दोनों की बर्बादी है। भारी विरोध और दबाव के बाद विभाग को अपना आदेश शिथिल करना पड़ा और 5 मार्च से स्थानीय स्तर पर फिर से मैनुअल प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    सड़क सुरक्षा पर गहराता संकट

    बिना उचित तकनीकी जांच के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करना आम जनता की जान से खिलवाड़ है। जानकारों का मानना है कि जर्जर और अनफिट वाहन सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनते हैं।

    नियमानुसार ब्रेक, लाइट, इंजन की स्थिति और प्रदूषण मानकों की बारीकी से जांच अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं हो पा रहा है। जिले में फिटनेस सेंटर स्थापित करने के लिए एक-दो आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं। स्वीकृति मिलने के बाद इन केंद्रों को चालू किया जाएगा।

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    विभाग का पक्ष

    जिला परिवहन अधिकारी राजकुमार प्रसाद ने बताया कि एमवीआई द्वारा फिजिकल जांच के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। कुछ दिनों के लिए प्रक्रिया बंद होने से स्थानीय वाहन मालिकों को काफी परेशानी हो रही थी, इसलिए मैनुअल व्यवस्था शुरू की गई है।

    विभाग का दावा है कि संसाधनों की कमी के बावजूद वह व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की चिंता है कि बिना आधुनिक फिटनेस सेंटर के यह प्रक्रिया किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।

    वाहन स्वामियों की सुविधा और सड़क सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना परिवहन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जिले में शीघ्र अधिकृत फिटनेस सेंटर स्थापित करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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