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    बिहार में 23 साल बाद योगी बनकर लौटा बेटा, बेटे को देख छलक पड़े पिता के आंसू; बोले- भिक्षा देकर ही करेंगे विदा

    Updated: Tue, 26 May 2026 05:37 PM (IST)

    बक्सर के धनसोई में 23 साल पहले घर छोड़कर गए युवक लखन शर्मा योगी के वेश में वापस लौटे। सारंगी की धुन पर अपने बचपन के गीत गाकर परिवार ने उन्हें पहचाना, ...और पढ़ें

    सारंगी की धुन ने खोल दी पुराने रिश्तों की पहचान

    सारंगी की धुन ने खोल दी पुराने रिश्तों की पहचान

    HighLights

    1. 23 साल बाद बेटा योगी बनकर घर लौटा।

    2. सारंगी की धुन से परिवार ने बेटे को पहचाना।

    3. पिता ने भावुक होकर बेटे को भिक्षा दी।

    संवाद सूत्र, धनसोई (बक्सर)। बक्सर जिले के धनसोई बाजार स्थित लोहार टोली में एक ऐसी भावुक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। 23 साल पहले घर छोड़कर गया युवक सोमवार को योगी के वेश में अपने ही घर भिक्षा मांगने पहुंच गया।

    लंबे बाल, बढ़ी दाढ़ी और संन्यासी रूप में पहुंचे युवक को पहले कोई पहचान नहीं पाया।

    लेकिन जब उसने सारंगी की धुन पर अपने बचपन और परिवार से जुड़े गीत गाने शुरू किए, तो परिजनों की आंखें भर आईं।

    सारंगी की धुन ने खोल दी पुराने रिश्तों की पहचान

    परिवार और गांव से जुड़े किस्सों को सुनते ही घरवालों ने उसे अपना खोया बेटा लखन शर्मा पहचान लिया।

    इसके बाद घर में चीख-पुकार और भावुक माहौल बन गया। आसपास के लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।

    परिजनों के अनुसार साल 2003 में 15 वर्षीय लखन शर्मा पिता की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था।

    काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला, जिसके बाद परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी।

    संन्यासी बनकर लौटा लखन, परिवार ने की घर रुकने की अपील

    सोमवार शाम अचानक लखन हाथ में सारंगी लिए जोगी के वेश में गांव पहुंचा। सूचना मिलते ही बहन, बहनोई और दूर-दराज के रिश्तेदार भी मौके पर पहुंच गए।

    सभी लोग उसे संन्यास छोड़कर घर लौट आने की अपील करते रहे।

    हालांकि उत्तर प्रदेश के एक मठ से दीक्षा ले चुके लखन ने साफ कहा कि अब वह संन्यास धर्म का पालन कर रहा है और अपने फैसले से पीछे नहीं हट सकता।

    पिता ने नम आंखों से दी बेटे को भिक्षा

    लखन ने बताया कि उसकी संन्यास प्रक्रिया तभी पूरी होगी, जब वह अपने माता-पिता के हाथों से भिक्षा ग्रहण करेगा। बेटे की इस बात को सुनकर परिवार और ज्यादा भावुक हो गया।

    आखिरकार पिता दीपक शर्मा ने भारी मन और नम आंखों से बेटे को भिक्षा देकर विदा किया।

    इस मार्मिक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

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