एयर मार्शल कृष्ण बिहारी सिंह और शारदा सिन्हा से जुड़ा है बक्सर का यह स्कूल, CM सम्राट ने बनाया आदर्श विद्यालय
बक्सर का ऐतिहासिक एमपी हाई स्कूल अब सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से जाना जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदर्श विद्यालय के रूप में नया स्वरूप ...और पढ़ें

बक्सर का एमपी हाईस्कूल। जागरण
HighLights
बक्सर का ऐतिहासिक एमपी हाई स्कूल अब सरस्वती विद्या निकेतन।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे आदर्श विद्यालय के रूप में समर्पित किया।
एयर मार्शल कृष्ण बिहारी सिंह और पद्म भूषण शारदा सिन्हा से संबंध।
शुभ नारायण पाठक, बक्सर। गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसे पौराणिक शहर बक्सर की शैक्षिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक ऐतिहासिक एमपी हाई स्कूल अब औपचारिक रूप से सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से जाना जाएगा।
रामरेखा घाट के समीप स्थित यह संस्थान केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल से लेकर आजादी के बाद के सामाजिक-शैक्षणिक परिवर्तनों का साक्षी रहा है।
सरस्वती विद्या निकेतन योजना के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते रविवार को इसे आदर्श विद्यालय के रूप में नया स्वरूप प्रदान किया।
ब्रिटिश काल में हंटर शिक्षा आयोग की सिफारिशों पर हुई थी स्थापना
इसके साथ ही यह गौरवशाली यात्रा एक नई अध्याय में प्रवेश कर चुकी है, जहां अतीत की जड़ें भविष्य की उड़ान से जुड़ रही हैं।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि यहां स्मार्ट क्लास, आइसीटी लैब, विज्ञान प्रयोगशाला और समृद्ध पुस्तकालय के साथ आधुनिक शिक्षण प्रणालियों के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में सिंचाई, रेल, सड़क, जल परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई प्रयास तेज किए।
1887 में बक्सर हाई इंग्लिश स्कूल के रूप में हुआ था स्थापित
ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1887 में “बक्सर हाई इंग्लिश स्कूल” के रूप में स्थापित यह विद्यालय 1882 के हंटर शिक्षा आयोग की सिफारिशों का जीवंत परिणाम था।
तत्कालीन शाहाबाद जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र बक्सर में स्थापित यह संस्थान अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार का प्रमुख माध्यम बना।
गंगा किनारे रामरेखा घाट की पावन भूमि पर स्थित होने के कारण विद्यालय ने छात्रों में केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का भी संचार किया।
महर्षि विश्वामित्र के आश्रम से जुड़ी इस धरती पर पढ़ने वाले छात्र दूर-दूर से, यहां तक कि गंगा पार के गांवों से भी आते थे।
स्वतंत्र भारत में बदला विद्यालय का नाम
स्वतंत्रता के बाद देश की बदलती जरूरतों को देखते हुए 1952-53 के मुदालियर आयोग की सिफारिश पर यह विद्यालय “बहुउद्देशीय उच्च विद्यालय” बना।
इससे छात्रों को विज्ञान, वाणिज्य, कला और व्यावसायिक विषयों का चुनाव करने का अवसर मिला। इसी बदलाव के बाद इसे एमपी हाई स्कूल के नाम से जाना जाने लगा।
इस परिवर्तन ने स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर और कौशल-उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पूर्ववर्ती छात्र रहे एयर मार्शल कृष्ण बिहारी सिंह
इस विद्यालय में वर्ष 2000 के आसपास तक प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नामांकन होता था। आदर्श विद्यालय में परिणत होने के बाद दोबारा वहीं व्यवस्था लागू कर दी गयी है।
यहां के पूर्ववर्ती छात्र काफी ऊंचे मुकाम तक पहुंच चुके हैं। भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल कृष्ण बिहारी सिंह भी उनमें एक हैं, जिन्होंने वर्ष 1997 में उनके द्वारा विद्यालय को उपहार में एक पुराना लड़ाकू विमान प्रदान किया था।
विद्यालय का संबंध पद्म भूषण स्व. शारदा सिन्हा से भी जुड़ा है। 1970 के दशक में उनकी पिता सुदेव ठाकुर यहां सम्मानित शिक्षक थे। शारदा सिन्हा इसी परिसर में पली-बढ़ीं, गंगा में स्नान किया और खुले आंगन में खेलीं।
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