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    मिथिला के मखाना का दुनिया में डंका! दरभंगा से कनाडा भेजा गया 7 मीट्रिक टन माल 

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 10:39 PM (IST)

    दरभंगा से पहली बार 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा निर्यात किया गया है, जिससे उत्तर बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। एपीडा ...और पढ़ें

    कनाडा रवाना हुआ मखाना। फोटो जागरण

    कनाडा रवाना हुआ मखाना। फोटो जागरण

    HighLights

    1. दरभंगा से 7 टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा को पहली बार निर्यात।

    2. एपीडा और न्यूट्रिविन एग्रो ने मिथिला मखाना को दी पहचान।

    3. मूल्य संवर्धन से किसानों को मखाना का बेहतर मूल्य मिला।

    जागरण संवाददाता, दरभंगा। उत्तर बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए दरभंगा से पहली बार सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना की समुद्री खेप कनाडा भेजी गई है। एपीडा के सहयोग से न्यूट्रिविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड की ओर से शुरू की गई यह पहल मिथिला के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

    विदेशों में बढ़ती मांग और गुणवत्ता सुधार के कारण स्थानीय किसानों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। प्रगतिशील किसान सिकंदर मुखिया, केशव साहनी और महेश मुखिया ने बताया कि अब वे सिर्फ कच्चा मखाना बेचने तक सीमित नहीं हैं।

    मखाना की प्रॉपर ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, फ्लेवरिंग और पैकेजिंग (वैल्यू एडिशन) से इसका वेस्टेज काफी कम हो गया है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का 10 से 15 प्रतिशत अधिक मूल्य मिल रहा है।

    बेल्जियम और दक्षिण अफ्रीका की तैयारी मिथिला का मखाना पहले से ही अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, ब्रिटेन, यूएई और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में निर्यात हो रहा है।

    शी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और निर्यातक सैय्यद फराज ने बताया कि हजारों स्थानीय किसानों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजार विस्तार जारी है। इसी क्रम में इसी महीने दरभंगा से दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम के लिए भी नई खेप रवाना की जाएगी।

    बिहार के कुल निर्यात में होगी वृद्धि

    राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि मखाना अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है। सुपरफूड के रूप में इसकी वैश्विक मांग आने वाले दिनों में और तेजी से बढ़ेगी।

    उन्होंने कहा कि भारत के कुल निर्यात में बिहार की मौजूदा भागीदारी लगभग 0.5 प्रतिशत है, जिसमें मखाना जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने से काफी सुधार होगा और मिथिला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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