भारत-ओमान समझौते से बिहार के मखाना एक्सपोर्ट को मिलेगा नया प्रोत्साहन, किसानों की बढ़ेगी इनकम
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है। यह समझौता सीमा शुल्क में रियायतों के साथ खाड़ी बाजारों ...और पढ़ें

भारत-ओमान समझौते से बिहार के मखाना एक्सपोर्ट को मिलेगा नया प्रोत्साहन (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, दरभंगा। भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सेपा) लागू होने से बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। जब वैश्विक व्यापार अनेक चुनौतियों और अनिश्चितताओं से गुजर रहा है, यह समझौता बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति और सशक्त बनाने का अवसर देता है।
बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में लगभग 85 प्रतिशत योगदान देता है। राज्य में प्रतिवर्ष 35 से 40 हजार टन मखाना का उत्पादन होता है। लाखों परिवार प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इससे अपनी आजीविका अर्जित करते हैं।
इसके बावजूद मखाना का वार्षिक निर्यात अभी लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये तक सीमित है, जबकि इसकी वैश्विक मांग और विस्तार की संभावनाएं कहीं अधिक हैं।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. मनोज कुमार का मानना है कि इस समझौते के अंतर्गत सीमा शुल्क में प्राप्त रियायतों के कारण ओमान सहित खाड़ी क्षेत्र के बाजारों में भारतीय मखाना की पहुंच और बढ़ेगी।
ओमान पश्चिम एशिया के देशों तक व्यापारिक पहुंच का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इससे बिहार के मखाना उत्पादकों, उद्यमियों और निर्यातकों को लाभ मिल सकता है।
कुमार के अनुसार, देश की नौ प्रतिशत से अधिक आबादी वाले बिहार की राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में लगभग तीन प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि कुल निर्यात में उसका योगदान लगभग 0.5 प्रतिशत ही है। यह दर्शाता है कि राज्य के पास निर्यात आधारित विकास की अपार संभावनाएं हैं।
डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि हाल के महीनों में मखाना व्यापार में आई मंदी से किसान, प्रसंस्करणकर्ता और उद्यमी चिंतित थे। ऐसे समय में यह समझौता नए उत्साह का संचार कर सकता है। निर्यात विस्तार से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी, वहीं प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार तथा उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उनके अनुसार गुणवत्ता मानकों, ब्रांड निर्माण, आधुनिक प्रसंस्करण तथा निर्यात अवसंरचना पर विशेष ध्यान देकर मखाना क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
यह समझौता केवल व्यापार विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और बिहार को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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