बिहार: स्कूल के लिए दान कर अपनी इकलौती जमीन, झोपड़ी में रहने वाले मजदूर ने पेश की त्याग की मिसाल
तुरकौलिया के वृतिया गांव में भूमिहीन मजदूर चंद्रिका मांझी ने प्राथमिक विद्यालय के लिए अपनी एकमात्र जमीन दान कर दी। उनके इस अनुकरणीय त्याग के लिए मुखिय ...और पढ़ें

मजदूर को भामाशाह पुरस्कार देते मुखिया। फोटो जागरण

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संवाद सहयोगी, तुरकौलिया। समाज में अनुकरणीय कार्य करने वाले व्यक्ति का सम्मान सभी करते हैं। सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को दुनिया हमेशा याद रखती है।
कुछ इसी तरह की सोच रखने वाले सपही पंचायत के वृतिया गांव के चंद्रिका मांझी को तुरकौलिया पूर्वी पंचायत के मुखिया विनय कुमार ने दानवीर भामाशाह सम्मान से सम्मानित किया है। उन्होंने यह सम्मान चंद्रिका मांझी को पंचायत की तरफ से दिया है।
गौरतलब है कि सपही वृतिया में प्राथमिक विद्यालय पीपल के पेड़ के नीचे चबूतरा के पास संचालित होता था। बाद में चंद्रिका मांझी के फूस के घर में उनके दरवाजे पर संचालित होने लगा।
सरकार फंड वापस होने की कगार पर
जहां सरकार ने भवन बनाने के लिए वर्ष 2007 में राशि आवंटित किया। भवन बनाने के लिए जमीन की तालाश होने लगी, लेकिन कोई आदमी विद्यालय भवन के लिए जमीन सरकार को देने के लिए तैयार नहीं हुआ। आवंटित राशि वापस होने के कगार पर आ गई थी।
यहां बताना जरूरी है कि सागरा और हड़मरवा गांव में भी दो और विद्यालय भवन बनाने का राशि आई थी, लेकिन किसी ने जमीन नहीं दी तो दोनों विद्यालयों को डेढ़-दो किलोमीटर दूर सपही बाजार और जटवा में शिफ्ट कर दिया गया।
यह सब देखकर चंद्रिका मांझी ने सोचा कि जमीन उपलब्ध नहीं होने पर यहां भी भवन नहीं बनेगा और स्कूल को एक-दो किलोमीटर दूर किसी विद्यालय में शिफ्ट कर दिया जाएगा। बच्चों को जाने में काफी परेशानी होगी। बच्चे पढ़ नही पाएंगे।समाज अशिक्षित ही रहेगा।
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खुद भूमिहीन हैं चंद्रिका मांझी
चंद्रिका मांझी शिक्षा की अहमियत को जानते थे। यह सब बातें उन्हें बेचैन करने लगी। आखिरकार उन्होंने समाज हित में फैसला किया कि अपने ही जमीन देकर भवन निर्माण करवाएंगे, जबकि चंद्रिका मांझी गैरमजरूआ जमीन में फूस का घर बनाकर अपनी पत्नी रामप्रभा देवी और दो बेटो अवधेश मांझी, अजीत आनंद के साथ रहते थे।
वह स्वयं भूमिहीन हैं, लेकिन उन्होंने मेहनत मजदूरी करके अपना घर बनाने के लिए लिए दो कट्ठा जमीन वर्ष 2003 में खरीदी थी। आखिरकार दो कट्ठा जमीन में से ही एक कट्ठा जमीन राज्यपाल के नाम सरकार को लिख दिया, जहां आज विद्यालय चलता है, जिसमें महादलित और असहाय लोगों का बच्चे पढ़ते हैं। एक से पांच वर्ग तक पढ़ाई होती है। करीब देढ़ दो सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसी काम को लेकर मुखिया विनय कुमार ने उन्हें सम्मानित किया है।