65 साल पुरानी जमाबंदी रद करने पर सांसद ने उठाए सवाल, पूर्वी चंपारण में एडीएम की जांच की मांग
सांसद सुधाकर सिंह ने पूर्वी चंपारण में 65 साल पुरानी जमाबंदी रद्द करने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा के फैसले की निष्पक्ष ...और पढ़ें
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पूर्वी चंपारण में मीडिया से मुखातिब सांसद। जागरण
HighLights
सांसद सुधाकर सिंह ने 65 साल पुरानी जमाबंदी रद्द करने पर सवाल उठाए।
अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा के फैसले की निष्पक्ष जांच की मांग।
किसानों की जोत-आबाद भूमि पर निर्माण कार्य रोकने की अपील।
जागरण संवाददाता, मोतिहारी । पूर्वी चंपारण जिले के मौजा पीपराकोठी खाता संख्या 156, खेसरा संख्या 507 की भूमि लगभग 65 वर्षे से वर्तमान खेतिहर किसानों के जोत-आबाद एवं शांतिपूर्ण कब्जे में है।
उक्त भूमि की मूल जमाबंदी वर्ष 1931-32 में स्थापित हुई थी। इसके उपरांत वैध स्थानांतरण के आधार पर वर्ष 1961 में वर्तमान भू-धारकों के पूर्वजों के नाम से जमाबंदी स्थापित की गई। तब से लेकर आज तक संबंधित भू-धारक नियमित रूप से सरकारी लगान का भुगतान करते आ रहे है।
इस अवधि में उक्त भूमि के विभिन्न हिस्सों का विधि सम्मत हस्तांतरण भी समय-समय पर किया गया है। उक्त बातें बक्सर के राजद सांसद सह सदस्य कृषि, पशुपालन व खाद्य प्रसंस्करण सुधाकर सिंह ने शुक्रवार को जिला अतिथि गृह में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
सांसद श्री सिंह ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न निर्णयों में यह प्रतिपादित किया गया है कि लंब समय से (60 वर्ष से अधिक) स्थापित जमाबंदी को निरस्त करने का अधिकार समाहर्ता, उप समाहर्ता सहित किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के पास नहीं है। ऐसे मामलों में विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पूर्णत: पालन किया जाना आवश्यक है।
बावजूद इसके अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा द्वारा संबंधित भूमि की सभी जमाबंदियों को निरस्त कर दिया गया। कहा कि यह कार्रवाई विधि सम्मत प्रक्रिया, न्यायिक सिद्धांत व न्यायपालिका की नियमावली के अनुरूप प्रतीत नहीं होती। इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
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सांसद ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण समेत इस मामले में जिला अपर समाहर्ता एवं अंचलाधिकारी के भूमिका की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
कहा- इसकी विशेष जांच हो कि सक्षम न्यायालय के द्वारा बिना सरकारी मालिकाना हक स्थापित हुए किसके निर्णय एवं किस आधार पर उपरोक्त भूमि पर प्रशासन के द्वारा निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।
किसानों को उनकी जोत-आबाद की भूमि पर किसी प्रकार की खेती करने से न रोका जाए, क्योंकि उनका मालिकाना हक 60 वर्ष पूर्व से स्थापित है। उन्होंने अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा द्वारा पारित अन्य मामलों की भी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।