गया में खुला बोरवेल छोड़ने वाली एजेंसी पर FIR कराने के निर्देश, NDRF टीम को किया गया सम्मानित
गया के फतेहपुर में 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय पीयूष कुमार को 7 घंटे के अभियान के बाद एनडीआरएफ ने सकुशल बचाया। ...और पढ़ें
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बच्चे के साथ मां। (जागरण)
HighLights
फतेहपुर में 4 वर्षीय पीयूष को बोरवेल से बचाया गया।
खुला बोरवेल छोड़ने वाली एजेंसी पर FIR दर्ज होगी।
जिले के सभी बेकार खुले बोरवेल बंद करने के निर्देश।
संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के गुरपा थाना क्षेत्र के रंगूनगर गांव में करीब 300 फीट गहरे बोरवेल में 35 फीट नीचे फंसे चार वर्षीय पीयूष कुमार को सात घंटे के कठिन अभियान के बाद गुरुवार की देर रात 1:50 बजे एनडीआरएफ की टीम ने सकुशल बाहर निकाल लिया।
बच्चे के सुरक्षित रेस्क्यू के साथ ही जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए खुला बोरवेल छोड़ने वाली एजेंसी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने, संबंधित अभियंता से स्पष्टीकरण मांगने तथा जिले के सभी बेकार पड़े खुले बोरवेल बंद कराने का निर्देश जारी कर दिया है।
डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि पीयूष का रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा। जिला और प्रखंड प्रशासन पूरी कार्रवाई के दौरान घटनास्थल पर डटा रहा तथा हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सहयोग से यह अभियान सफल हो सका। डीएम ने बताया कि जिस अभियंता की देखरेख में बोरवेल कराया गया था, उसकी भूमिका की जांच करते हुए उससे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
वहीं, बोरवेल खोदने के बाद उसे खुला छोड़ने वाली एजेंसी के खिलाफ संबंधित विभाग को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा जिले के सभी प्रखंडों के बीडीओ और संबंधित अधिकारियों को बेकार पड़े खुले बोरवेल की जांच कर उन्हें तत्काल बंद कराने का आदेश दिया गया है। रेस्क्यू पूरा होते ही पहले से तैयार एंबुलेंस और चिकित्सकों की टीम पीयूष को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फतेहपुर ले गई।
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यहां करीब चार घंटे तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने के बाद उसके दाहिने पैर में फ्रैक्चर और सूजन मिलने पर बेहतर इलाज के लिए पहले जयप्रकाश नारायण अस्पताल, गया और फिर अनुग्रह मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया।
मगध मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने जांच के बाद उसके दाहिने पैर में कच्चा प्लास्टर किया, आवश्यक दवाएं दीं और 15 दिन बाद दोबारा जांच के लिए बुलाते हुए घर भेज दिया। पीयूष के घर लौटते ही उसे देखने वालों का तांता लग गया।
गांव की गलियों में दिनभर एक ही चर्चा रही, पीयूष बच गया। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे उसे देखने पहुंचे। परिवार ने इसे ईश्वर की कृपा, रेस्क्यू टीम की मेहनत और लोगों की दुआओं का परिणाम बताया।
इस घटना ने दिखाया कि संकट की घड़ी में प्रशासन, रेस्क्यू एजेंसियां और आम लोग जब एकजुट होकर प्रयास करते हैं तो कठिन से कठिन चुनौती पर भी विजय पाई जा सकती है।
जवानों को किया गया सम्मानित
गयाजी के फतेहपुर में बोरवेल में फंसे तीन साल के बच्चे का सफल रेस्क्यू कर एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन शुक्रवार को मुख्यालय पहुंची, जहां टीम कमांडेंट ने सभी जवानों को सम्मानित किया।
कमांडेंट हितेन्द्र पाल सिंह कंदारी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद एक टीम को तुरंत गयाजी के फतेहपुर ब्लाक के गांव भेजा गया था। कमांडेंट ने बताया कि हमारे पास कई अत्याधुनिक कैमरे और उपकरण हैं, जो इस तरह की घटनाओं में उपयोगी होते हैं।