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रक्षाबंधन 2026: जर्मनी से बोधगया पहुंचे माइकल ने बंधवाई राखी, बोले- यह अनुभव बेहद खास

Published: Fri, 28 Aug 2026 04:57 PM (IST)

जर्मनी से बोधगया आए माइकल ने कल्याण परिवार की बहनों से राखी बंधवाकर भारतीय संस्कृति के पवित्र पर्व रक्षाबंधन का ...और पढ़ें

जर्मनी के माइकल ने बोधगया में बंधवाई राखी, भारतीय संस्कृति से हुए अभिभूत

जर्मनी के माइकल ने बोधगया में बंधवाई राखी, भारतीय संस्कृति से हुए अभिभूत

HighLights

  1. जर्मनी के माइकल ने बोधगया में राखी बंधवाकर अनुभव किया।

  2. कल्याण परिवार की बहनों ने पारंपरिक तरीके से राखी बांधी।

  3. माइकल भारतीय संस्कृति और भाई-बहन के प्रेम से अभिभूत हुए।

संवाद सूत्र, बोधगया। भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास और एक-दूसरे की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक रक्षाबंधन अब विदेशी नागरिकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

शुक्रवार को रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) के अवसर पर जर्मनी से बोधगया पहुंचे माइकल ने कल्याण परिवार की बहनों से राखी बंधवाकर भारतीय संस्कृति की इस अनूठी परंपरा को करीब से महसूस किया।

कल्याण परिवार की बहनों ने पारंपरिक तरीके से माइकल के माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद बहनों ने उन्हें मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

माइकल ने बहनों को दिया गिफ्ट

भाई के रूप में मौजूद माइकल ने भी बहनों को आशीर्वाद देते हुए उन्हें उपहार भेंट किया और हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया।

इस दौरान कल्याण परिवार के मुरारी सिंह चंद्रवंशी ने बताया कि माइकल ने रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को जाना और भारतीय परंपरा के अनुरूप राखी बंधवाकर काफी प्रभावित हुए।

'भाई-बहन के बीच प्रेम देखकर खुश हूं'

माइकल ने कहा कि जर्मनी में इस तरह का पर्व नहीं मनाया जाता है। बोधगया में रक्षाबंधन की परंपरा और भाई-बहन के बीच प्रेम देखकर वह बेहद खुश हैं।

उन्होंने कहा कि अपने हाथ पर रक्षा सूत्र बंधवाना मेरे लिए बेहद खास और सुखद अनुभव रहा। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने न सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते की मिठास को दर्शाया, बल्कि भारतीय संस्कृति की सीमाओं से आगे बढ़कर विदेशों में भी लोगों को भारतीय परंपरा से परिचित कराया है। यह परंपरा वसुधैव कुटुंबकम् (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) की भावना को दर्शाया है।

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