चैत्र नवरात्र से चैती छठ तक: ऐसे करें मां की पूजा, जानें पूरे पर्व का शुभ समय और महत्व
चैत्र नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रही है, जिसमें मां शैलपुत्री की पूजा होगी और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:53 बजे तक है। 27 मार्च को रामन ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्र गुरुवार से शुरू
HighLights
चैत्र नवरात्र गुरुवार से, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त।
27 मार्च को रामनवमी, 28 मार्च को नवरात्र समापन।
22 मार्च से चैती छठ, थावे महोत्सव भी होगा।
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। गुरुवार से Chaitra Navratri का शुभारंभ हो रहा है। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार नवरात्र पूरे नौ दिनों का होगा। पंडित किशोर उपाध्याय के अनुसार, सुबह 6:52 से 7:53 बजे तक कलश स्थापना का शुभ समय रहेगा। इसी दौरान पूजा शुरू करना विशेष फलदायी माना जाता है।
ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा
पहले दिन स्नान के बाद घर या मंदिर में कलश स्थापना करें। मां शैलपुत्री को शुद्ध घी अर्पित करें और लाल फूल चढ़ाएं। देवी के मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
27 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी
नवरात्र के नौवें दिन Ram Navami का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भक्त हवन और कन्या पूजन करते हैं। 28 मार्च को दशमी के दिन नवरात्र का विधिवत समापन होगा।
थावे मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
Thawe Durga Temple में हर साल की तरह इस बार भी भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
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अन्य मंदिरों में भी तैयारी तेज
नकटो भवानी, घोड़ाघाट और लछवार स्थित दुर्गा मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने सभी प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
थावे महोत्सव का भी होगा आयोजन
इस वर्ष 28 और 29 मार्च को थावे महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम होमगार्ड मैदान में आयोजित होगा, जिसके लिए प्रशासन ने कई समितियों का गठन कर तैयारियां तेज कर दी हैं।
चैती छठ की भी शुरुआत
Chaiti Chhath का चार दिवसीय अनुष्ठान 22 मार्च से शुरू होगा। पहले दिन नहाय-खाय, 23 मार्च को खरना, 24 को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
पूजा और व्रत का विशेष महत्व
चैत्र नवरात्र और चैती छठ दोनों ही आस्था और शक्ति की उपासना के पर्व हैं। इन दिनों नियम, संयम और विधि-विधान से पूजा करने पर मां दुर्गा और भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।