Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    दो बार 'कायाकल्प' अवार्ड जीता पर व्यवस्था राम भरोसे, 3 लाख की आबादी पर कुचायकोट CHC में सिर्फ 3 डॉक्टर

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 08:00 AM (GMT+05:30)

    दो बार कायाकल्प पुरस्कार से सम्मानित कुचायकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। ...और पढ़ें

    कुचायकोट CHC में सिर्फ 3 डॉक्टर

    कुचायकोट CHC में सिर्फ 3 डॉक्टर

    HighLights

    1. दो बार कायाकल्प पुरस्कार विजेता कुचायकोट CHC स्टाफ की कमी से जूझ रहा।

    2. तीन लाख आबादी के लिए केवल तीन डॉक्टर और तीन जीएनएम कार्यरत हैं।

    3. एक्स-रे और एंटी-रेबीज इंजेक्शन जैसी सुविधाएं भी मरीजों को नहीं मिल रहीं।

    संवाद सूत्र, कुचायकोट (गोपालगंज)। लगातार दो बार कायाकल्प पुरस्कार से सम्मानित कुचायकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चमक मानव संसाधनों की भारी कमी के आगे फीकी पड़ गई है। आधुनिक भवन, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और बेहतर आधारभूत संरचना होने के बावजूद करीब तीन लाख आबादी और 222 गांवों की स्वास्थ्य सेवा महज तीन चिकित्सकों और एक विशेषज्ञ डॉक्टर के भरोसे चल रही है। 

    100 मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं

    नतीजतन प्रतिदिन इलाज के लिए आने वाले करीब 100 मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। 30 बेड वाले इस अस्पताल में एक्स-रे मशीन, जीवन रक्षक उपकरण और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं। 

    26 मार्च को गोल्डन आवर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के इलाज के लिए छह लाख रुपये से अधिक के अत्याधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन प्रशिक्षित टेक्निशियन नहीं होने से ये उपकरण अधिकांश समय बेकार पड़े रहते हैं। 

    चिकित्सकों के 16 पद स्वीकृत

    अस्पताल में चिकित्सकों के 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित केवल तीन चिकित्सक ही कार्यरत हैं। फरवरी में दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती हुई थी, पर उनमें से एक डॉ. जितेंद्र कुमार पिछले दो माह से बिना सूचना के अनुपस्थित हैं। 

    खबरें और भी

    वर्तमान में केवल स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना कुमारी ही विशेषज्ञ सेवाएं दे रही हैं। दंत रोग, शिशु रोग, जनरल फिजिशियन और आयुष चिकित्सक सहित कई अहम पद लंबे समय से रिक्त हैं। नर्सिंग व्यवस्था भी बदहाल है। 

    केवल तीन जीएनएम कार्यरत

    27 स्वीकृत जीएनएम पदों के विरुद्ध केवल तीन जीएनएम कार्यरत हैं। इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल और उपचार व्यवस्था पर पड़ रहा है। एक्स-रे मशीन होने के बावजूद उसका लाभ मरीजों को नियमित नहीं मिल पा रहा है। 

    थावे से प्रतिनियुक्त तकनीकी कर्मी सप्ताह में केवल सोमवार, मंगलवार और बुधवार को ही सेवा देते हैं। बाकी चार दिन एक्स-रे कक्ष बंद रहता है, जिससे मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है।

    एंटी-रेबीज इंजेक्शन भी लंबे समय से उपलब्ध नहीं

    अस्पताल में कई जरूरी दवाओं के साथ एंटी-रेबीज इंजेक्शन भी लंबे समय से उपलब्ध नहीं है। कुत्ता, सियार या अन्य जानवरों के काटने वाले मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।

    लगातार दो बार कायाकल्प पुरस्कार

    स्वच्छता, गुणवत्ता और बेहतर प्रबंधन के लिए वर्ष 2025 और 2026 में लगातार दो बार कायाकल्प पुरस्कार जीतने वाला यह अस्पताल आज डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र रिक्त पद नहीं भरे गए तो पुरस्कार पाने वाला यह अस्पताल भी मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं देने में पीछे रह जाएगा।

    यह भी पढ़ें- 146 साल बाद भी बिजली को तरस रहा हथुआ का ऐतिहासिक संस्कृत कॉलेज, 10 में से 9 पद खाली; अब सिर्फ बंट रही डिग्रियां