Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गोपालगंज में किसान की पहल से तालाब की बदली सूरत, मछली-बतख पालन से बढ़ी लोगों की आय

    Updated: Fri, 01 May 2026 01:08 PM (GMT+05:30)

    हथुआ प्रखंड का रुपनचक चंवर अब मछली पालन और नौकायन के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। एक बुजुर्ग किसान की पहल से यह बंजर भूमि आय का स्रोत बन गई है। ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, गोपालगंज। हथुआ प्रखंड का रुपनचक चंवर अब पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए तैयार है। अब लोग मछलियों की अठखेलियों के बीच इस चंवर में बने तालाबों में नौकायन भी कर सकेंगे। करीब 15 साल पूर्व एक बुजुर्ग किसान की पहल से इस चंवर की सूरत को पूरी तरह से बदल गई है।

    चंवर में बनाए गए तालाब में मछलियां अठखेलियां करतीं हैं। यह मछलियां इस गांव के करीब दो दर्जन परिवार के लोगों की आय का साधन हैं। मछली पालन के साथ ही यहां हेचरी भी है। इस हेचरी में मछली के बीज तैयार हो रहे हैं। तालाब में बतख पालन भी होता है।

    करीब 250 एकड़ में फैले हथुआ प्रखंड के रुपनचक चंवर में तीन दशक पूर्व दर्जनों किसानों की जमीन बेकार पड़ी थी। साल भर कीचड़ युक्त पानी भरे रहने के कारण किसान अपनी जमीन में खेती नहीं कर पाते थे। तब यह चंवर अपराधियों का ऐशगाह माना जाता था।

    लोग इस चंवर की तरफ आने से भी डरते थे। इसी बीच करीब 15 साल पूर्व रुपनचक गांव निवासी जयबहादुर सिंह ने इस चंवर की दशा को बदलने की ठानी। चकबंदी विभाग में अमीन के पद पर कार्यरत जयबहादुर सिंह नौकरी छोड़ कर अपने गांव आ गए। उनके पुत्र बताते हैं कि इस चंवर में दर्जनों किसानों की जमीन बेकार पड़ी थी।

    खबरें और भी

    प्रारंभ में कोई भी ग्रामीण चंवर को उपयोगी बनाने के लिए प्रारंभ किए गए उनके प्रयास में साथ नहीं आया। लोगों का साथ नहीं मिलने पर भी वे निराश नहीं हुए। उन्होंने चंवर में स्थित अपनी डेढ़ बीघा जमीन में तालाब बनाकर उसमें मछली पालन शुरु किया। तालाब के किनारे सागवान के पौधे लगाए। इनकी इस पहल को देखकर ग्रामीण भी धीरे-धीरे उनके साथ मुहिम में जुटते चले गए।

    अब इस चंवर में 70 एकड़ में तालाब बनाकर मछली पालन किया जाता है। यहां हेचरी भी बनाया गया है। जिसमें मछली के बीज भी तैयार होते हैं। तालाब किनारे बतख व मुर्गी पालन भी ग्रामीणों की आय बढ़ा रहा है। ग्रामीणों के इस प्रयास से इस चंवर की सूरत बदल गई है। यहां अब हर तरफ हरियाली नजर आती है। लोग यहां अब घूमने के लिए भी आते हैं।

    यह भी पढ़ें- बक्सर में वाहनों की सुरक्षा मानकों की खुली पोल, मैनुअल जांच कर दिया जा रहा प्रमाणपत्र; मॉडर्न फिटनेस मशीनों का अभाव

    यह भी पढ़ें- पश्चिम चंपारण में पुलिस का बड़ा अभियान: 20 फरार अपराधियों की संपत्ति कुर्क, हड़कंप