पंचायत चुनाव से पहले बिहार में आरक्षण का गणित, किसकी खुलेगी किस्मत और किसकी बढ़ेगी टेंशन?
जहानाबाद में पंचायत चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां संभावित उम्मीदवार आरक्षण रोस्टर के गणित में जुटे हैं। जनसंख्या आंक ...और पढ़ें

रोटेशन सिस्टम बदल सकता है चुनावी समीकरण
HighLights
जहानाबाद में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज।
संभावित उम्मीदवार आरक्षण रोस्टर के गणित में जुटे हुए हैं।
2011 जनगणना के आधार पर तय होगा सीटों का आरक्षण।
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जहानाबाद जिले में पंचायत चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी नहीं हुई हो, लेकिन गांवों की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से जनसंख्या संबंधी आंकड़े जारी होने के बाद संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थक आरक्षण रोस्टर के गणित में जुट गए हैं।
पंचायतों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार किस पद पर किस वर्ग के लिए आरक्षण लागू होगा और किसे चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। इसी को लेकर चौपालों से लेकर बाजार तक चर्चाओं का दौर तेज है।
जनसंख्या के आंकड़ों में तलाश रहे चुनावी भविष्य
संभावित उम्मीदवार जारी जनसंख्या आंकड़ों का अध्ययन कर अपने-अपने स्तर पर सीटों के आरक्षण का अनुमान लगा रहे हैं। कई पंचायतों में पिछले चुनावों के रोस्टर और इस बार की संभावनाओं की तुलना की जा रही है।
विशेष रूप से उन पंचायतों में उत्सुकता ज्यादा है, जहां पिछले दो चुनावों से लगातार एक ही वर्ग के लिए सीट आरक्षित रही है। ऐसे क्षेत्रों में इस बार बदलाव की संभावना को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।
रोटेशन सिस्टम बदल सकता है चुनावी समीकरण
यदि किसी पंचायत में पिछली बार कोई सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी, तो चक्रानुक्रम यानी रोटेशन प्रणाली के तहत इस बार वह पुरुष वर्ग के लिए हो सकती है। इसी तरह अन्य आरक्षित श्रेणियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।
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आरक्षण के संभावित बदलाव ने कई नए चेहरों को चुनावी तैयारी शुरू करने का मौका दिया है, जबकि कुछ पुराने दावेदारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
गांव-गांव बढ़ा जनसंपर्क अभियान
आरक्षण की तस्वीर साफ होने से पहले ही संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। सामाजिक कार्यक्रमों, पारिवारिक आयोजनों और गांव के छोटे-बड़े आयोजनों में उनकी सक्रियता बढ़ गई है।
कई दावेदार बिना निमंत्रण के भी सुख-दुख के कार्यक्रमों में पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। पंचायत चुनाव की आहट के साथ गांवों में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है।
कैसे तय होता है आरक्षण रोस्टर?
आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में आयोग सबसे पहले अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्गों की आबादी का आकलन करता है।
जिन पंचायतों या वार्डों में निर्धारित सीमा से अधिक संबंधित वर्ग की आबादी होती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सीट आरक्षित की जाती है।
इसके बाद अन्य वर्गों के लिए आरक्षण तय होता है और अंत में सामान्य वर्ग की सीटों का निर्धारण किया जाता है। पूरी प्रक्रिया आयोग के निर्धारित नियमों और चक्रानुक्रम प्रणाली के तहत पूरी की जाती है।
2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी प्रक्रिया
वर्तमान पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार की जाएगी।
जहानाबाद जिले में कुल 88 पंचायतें और 1260 वार्ड हैं, जबकि जिला परिषद सदस्यों की संख्या 13 है। ऐसे में आरक्षण रोस्टर का असर जिले की बड़ी आबादी और सैकड़ों संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक योजनाओं पर पड़ने वाला है।
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