Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जहानाबाद के आंगनबाड़ी केंद्रों में RO-LED खरीद पर सवाल, सेविकाओं से मांगा जा रहा चेक

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 02:41 PM (IST)

    जहानाबाद जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आरओ और एलईडी खरीद में अनियमितता सामने आई है। सरकार ने सेविकाओं के खाते में सीधे 35 हजार रुपये भेजे थे, लेक ...और पढ़ें

    जहानाबाद का आंगनबाड़ी केंद्र। (जागरण)

    जहानाबाद का आंगनबाड़ी केंद्र। (जागरण)

    HighLights

    1. आंगनबाड़ी केंद्रों में आरओ-एलईडी खरीद में अनियमितता।

    2. सेविकाओं के खाते में आए पैसे का सीडीपीओ मांग रहे चेक।

    3. जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने जांच के आदेश दिए, कार्रवाई संभव।

    जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आरओ और एलईडी खरीद को लेकर अनियमितता का मामला सामने आया है।

    सरकार द्वारा प्रत्येक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र के लिए 35 हजार रुपये सीधे सेविकाओं के खाते में भेजे गए हैं, लेकिन अब सीडीपीओ कार्यालय द्वारा उसी राशि का चेक मांगा जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार जिले में करीब 250 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां शुद्ध पेयजल के लिए आरओ और एलईडी लगाने की योजना है। राशि मिलने के बाद सेविकाएं खरीदारी की तैयारी में जुटी थीं।

    तभी सीडीपीओ कार्यालय से संबंधित वॉट्सऐप ग्रुप में संदेश प्रसारित कर उन्हें चेक लेकर आने को कहा गया। इस प्रक्रिया की शुरुआत रतनी फरीदपुर प्रखंड से हुई, जहां 55 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र हैं।

    इसके बाद सेविकाओं में भ्रम की स्थिति बन गई है कि वे सरकार के निर्देशानुसार स्वयं खरीदारी करें या राशि सीडीपीओ को सौंप दें। कुछ सेविकाएं आदेश के दबाव में चेक जमा भी कर चुकी हैं।

    सेविकाओं का कहना है कि यदि वे खुद खरीदारी नहीं करती हैं और बाद में सामान की गुणवत्ता में गड़बड़ी होती है,तो जिम्मेदारी उन्हीं पर आएगी।

    सीडीपीओ से स्पष्टीकरण

    ऐसे में सीडीपीओ के स्तर पर जवाबदेही से बचने की आशंका भी जताई जा रही है,जिसके कारण विरोध शुरू हो गया है। मामला जिला प्रोग्राम पदाधिकारी रचना के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने रतनी फरीदपुर के सीडीपीओ से स्पष्टीकरण मांगा है।

    उन्होंने बताया कि सदर प्रखंड से भी इसी तरह की शिकायतें मिल रही हैं और पूरे जिले में इसकी जांच कराई जा रही है। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह गलत है।

    संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित सीडीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। सार्वजनिक तौर पर सीडीपीओ कार्यालय से वॉट्सऐप ग्रुप पर भेजे जा रहे हैं, आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इसे लोग सरकारी योजनाओं में बंदराबाट के रूप में देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि बाल विकास परियोजना में हमेशा से सरकार की योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रही है।

    इस बार खुलेआम इसकी कोशिश की गई है। हालांकि विभाग ने सख्त रूख अख्तियार कर लिया है। अब देखने वाली बात होती है इस पर क्या कार्रवाई की जाती है।

    यह भी पढ़ें- बिहार में अब सरकारी कर्मचारी सोच-समझकर सोशल मीडिया पर करें पोस्ट, एक गलती पर जा सकती है नौकरी