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    खाकी की आड़ में डकैती, जमुई से झारखंड तक खौफ; वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की धड़कन

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 03:54 PM (IST)

    खाकी के भेष में एक अंतरराज्यीय गिरोह ने सिमुलतला (जमुई) और गिरिडीह (झारखंड) में लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। गिरिडीह के वायरल CCTV फुटेज से सिमुल ...और पढ़ें

    HighLights

    1. खाकी के भेष में अंतरराज्यीय गिरोह ने की बड़ी लूट।

    2. सिमुलतला और गिरिडीह में ₹15-25 लाख की वारदातें।

    3. वायरल वीडियो से लुटेरों की पहचान, पुलिस को चुनौती।

    संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। बिहार और झारखंड की सीमाओं को लांघकर फर्जी पुलिस गिरोह ने कानून के इकबाल को खुली चुनौती दी है। सिमुलतला के टेलवा बाजार में 8 दिसंबर 2025 को शिक्षक संजीव साह उर्फ बउआ के घर हुई 15 लाख की लूट की पटकथा अब झारखंड के गिरिडीह में दोहराई गई है।

    बीते 1 अप्रैल को गिरिडीह में स्वर्ण व्यवसायी से हुई 25 लाख की लूट के सीसीटीवी फुटेज ने इस पूरे मामले में धमाकेदार मोड़ ला दिया है। झारखंड की वारदात का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होते ही पीड़ित शिक्षक संजीव साह सिमुलतला थाने पहुंचे।

    पुलिस जैसा गेटअप

    उन्होंने पुलिस को साक्ष्य देते हुए दावा किया कि उनके घर और गिरिडीह में लूट को अंजाम देने वाले अपराधी और उपयोग में लाई गई सफेद स्कार्पियो हूबहू एक जैसा ही हैं। सवाल यह है कि क्या सिमुलतला पुलिस इस डिजिटल सुराग के सहारे लुटेरों के गिरेबान तक पहुंच पाएगी?

    विदित हो कि सिमुलतला के इस सनसनीखेज कांड ने शिक्षक के घर चल रहे अघोषित बैंकिंग के खेल से भी पर्दा उठा दिया था। जब चंद्रमंडी के व्यवसायी अपने ग्राहकों के साथ शिक्षक के घर सोना मांगने पहुंचे, तब स्पष्ट हुआ कि वहां बड़े पैमाने पर गिरवी और सूदखोरी का धंधा चल रहा था।

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    अपराधियों को कैसे पता चला?

    यक्ष प्रश्न है कि अपराधियों को यह कैसे पता था कि जेवर किस अलमारी में हैं? शिक्षक ने तब उन व्यवसायियों पर ही साजिश की सुई घुमाई थी, जिन्होंने वहां सोना गिरवी रखा था।

    खुद को चकाई पुलिस बताकर घर में घुसना और फिर रफूचक्कर हो जाना पुलिसिया तंत्र की विफलता पर बड़ा प्रहार है। झाझा एसडीपीओ राजेश कुमार से बात करने पर बताया कि अपराधी की पहचान नहीं हुई है।

    जांच चलने की बात तो कह रहे हैं, लेकिन दो राज्यों की पुलिस को छकाने वाला यह गिरोह अब भी पहुंच से बाहर है। जनता की नजरें अब खाकी की साख बचाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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