बिहार में सरकार ने नहीं सुनी गुहार, तो किसानों ने खुद थामी कुदाल; श्रमदान से साफ कर दी नहर
जमुई के किसानों ने प्रशासन की उदासीनता से परेशान होकर कैंडीह वितरणी नहर की खुद सफाई की। धान की रोपनी से पहले सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने श्र ...और पढ़ें
HighLights
किसानों ने कैंडीह वितरणी नहर की सफाई की।
प्रशासन की उदासीनता के कारण खुद उठाया कदम।
धान की सिंचाई के लिए श्रमदान किया।
जागरण संवाददाता, जमुई। खेतों तक पानी पहुंचाने वाली सिंचाई नहर जब जिम्मेदारों की उदासीनता का शिकार हुई तो किसानों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही मोर्चा संभाल लिया।
कैंडीह वितरणी में जमा गाद, झाड़-झंखाड़ और कचरे से परेशान किसानों ने शनिवार को श्रमदान कर नहर की सफाई शुरू कर दी। हाथों में कुदाल लेकर किसान नहर में उतरे और घंटों मेहनत कर पानी के रास्ते को साफ किया।
प्रमोद मोदी, बनारसी यादव, उमेश मोदी, परमेश्वर यादव, अरुण मोदी आदि किसानों का कहना था कि बार-बार शिकायत के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से गंभीर पहल नहीं की गई, जिसके बाद उन्हें खुद आगे आना पड़ा।
कैंडीह वितरणी से आसपास के गांवों के खेतों की सिंचाई होती है। नहर की समुचित सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह गाद और झाड़ियां जमा हो गई थीं। इससे नहर में पानी का प्रवाह प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी।
खेती में हो रही थी देरी
धान की रोपनी के मौसम में सिंचाई को लेकर किसान पहले से ही चिंतित थे। किसानों ने बताया कि समय रहते नहर की सफाई नहीं होती तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ता।
किसानों ने कहा कि खेती उनके लिए आजीविका का आधार है। नहर की सफाई के लिए सरकारी व्यवस्था का इंतजार करते-करते समय निकलता जा रहा था। आखिरकार किसानों ने सामूहिक निर्णय लेकर श्रमदान शुरू किया।
ग्रामीणों ने कहा कि किसानों का यह प्रयास केवल नहर की सफाई नहीं, बल्कि व्यवस्था को जगाने का भी संदेश है। किसानों ने अब भी उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग कैंडीह वितरणी की स्थायी सफाई और मरम्मत की दिशा में ठोस पहल करेगा।