कमाल की दोस्ती! जमुई के 2 छात्रों ने साथ में तय किया नर्सरी से कोटा का सफर, अब दोनों बनेंगे डॉक्टर
जमुई के दो जिगरी दोस्त हर्षित और आदित्य ने दो बार की असफलता के बाद तीसरे प्रयास में एक साथ नीट यूजी परीक्षा पास की है। नर्सरी से कोटा तक साथ पढ़ाई कर, ...और पढ़ें

हर्षित और आदित्य को मिठाई खिलाते स्वजन। जागरण
HighLights
हर्षित और आदित्य ने तीसरे प्रयास में नीट यूजी परीक्षा पास की।
दोनों ने नर्सरी से कोटा तक की पढ़ाई साथ में की।
अब वे डॉक्टर बनकर समाज और गरीबों की सेवा करेंगे।
संवाद सहयोगी, जमुई। बचपन से साथ पढ़ाई की दो साथियों ने दो बार मिली असफलता को नजर अंदाज करते हुए तीसरे प्रयास में नीट यूजी की परीक्षा में एक साथ बाजी मार ली और अब एक साथ डॉक्टर बनकर समाज व गरीबों की सेवा करेंगे।
दोनों साथी के इस कामयाबी के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। कहा जाता है कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता है। सारी बाधाएं दूर हो जाती है।
ऐसा ही कर दिखाया है टाउन थाना क्षेत्र के दो जिगरी दोस्त हर्षित कुमार और आदित्य कुमार ने। दोनों ने एक साथ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट में न केवल सफलता हासिल की है, बल्कि पूरे जिले का नाम देश स्तर पर रोशन किया है।
दरअसल, हर्षित के पिता उमाशंकर भगत शहर के महाराजगंज में साइकिल की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां गृहणी है। बताया जाता है कि हर्षित के बड़े भाई ने भी चार वर्ष पूर्व नीट की परीक्षा में सफलता हासिल की थी, जबकि आदित्य के पिता धर्मपाल कुमार किसान हैं और मां गृहणी है।
आदित्य के पिता खेती-बाड़ी कर कड़ी मशक्कत से बेटे को अच्छी शिक्षा दी। आज उनकी मेहनत ने रंग लाई जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।
एक साथ रहा नर्सरी से कोटा तक का सफर
हर्षित और आदित्य की यह अटूट दोस्ती और सफलता की कहानी शहर के एक निजी विद्यालय संत जोसेफ, जमुई से शुरू हुई थी। दोनों ने नर्सरी से लेकर 10वीं तक की पढ़ाई एक साथ की। वर्ष 2022 में आईसीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में दोनों ने 90 फीसदी से अधिक अंक लाकर अपनी मेधा का परिचय दिया था।
खबरें और भी
इसके बाद दोनों ने बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास की और डॉक्टर बनने का सपना लेकर एक साथ राजस्थान के कोटा चले गए। कोटा में एलन कोचिंग इंस्टीट्यूट के मार्गदर्शन और दोनों की कड़ी मेहनत रंग लाई और आज दोनों ने देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा को क्रैक कर लिया है।
उमाशंकर भगत ने कहा कि बहुत ही हर्ष की बात है कि मेरे पुत्र हर्षित ने पूरे भारत वर्ष में 2757वां स्थान प्राप्त किया है। कोटा में रहकर पूरे परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरा और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया है। वह डॉक्टर बनकर समाज व गरीबों की सेवा करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सप्ताह में एक दिन गरीबों का फ्री इलाज करेगा।
वहीं धर्मपाल कुमार ने बताया कि आदित्य ने बचपन से ही पढ़ाई में हमेशा अव्वल प्रदर्शन किया है। 10वीं में 98 प्रतिशत अंक लाने के बाद से ही उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना था। आज उसकी 13437वीं रैंक पूरे परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
इधर, दो दोस्तों की इस दोहरी सफलता की खबर जैसे ही शहर में फैली, महाराजगंज और भाटचक स्थित उनके आवासों पर बधाई देने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा।
स्थानीय लोगों और करीबियों का कहना है कि हर्षित और आदित्य की जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में मिलकर मेहनत की जाए, तो सफलता एक दिन कदम जरूर चूमती है।
यह भी पढ़ें- नीट में फेल होने पर हमीरपुर की छात्रा ने दी जान, दो साल से कोटा में कर रही थी तैयारी