नीट में सफलता का मूल मंत्र: 2 बार फेल होने के बाद सृष्टि ने खुद की कमियों को पहचाना, फिर बनीं जिद्दी, कर दिया कमाल
सिमुलतला, जमुई की सृष्टि राज ने नीट-यूजी 2026 में 577 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर 8107वीं रैंक हासिल की है। दो बार की असफलता के बाद अपनी कमियों ...और पढ़ें
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जमुई की बेटी सृष्टि राज को Well done! नाकामी से डॉक्टर बनने तक का सफर, NEET में 8107वीं रैंक लाकर किया कमाल
HighLights
सृष्टि राज ने नीट-यूजी 2026 में 577 अंक प्राप्त किए।
दो बार की असफलता के बाद कड़ी मेहनत से सफलता पाई।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का है लक्ष्य।
संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद पर अटूट भरोसा हो, तो जिंदगी की हर मुश्किल राह बेहद आसान हो जाती है। ऐसा ही कुछ ऐतिहासिक कारनामा जमुई जिले के सिमुलतला प्रखंड अंतर्गत टेलवा बाजार की होनहार और जुझारू बेटी सृष्टि राज ने कर दिखाया है।
नीट परीक्षा में गाड़े झंडे
सृष्टि ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे कठिन मानी जाने वाली नीट-यूजी 2026 की परीक्षा में 577 शानदार अंक प्राप्त किए हैं। इस बेहतरीन स्कोर के साथ सृष्टि ने अखिल भारतीय स्तर पर अपनी कैटेगरी में 8107वीं रैंक हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

सफलता की राह नहीं थी आसान
प्लस टू हाई स्कूल, टेलवा बाजार से 10वीं और 12वीं में 85 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल टॉपर रहीं सृष्टि का सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में पिता राजदेव प्रसाद की अचानक अस्वस्थता और पढ़ाई में थोड़े अनुशासन की कमी के कारण उन्हें असफलता मिली थी।
हार के बाद भी नहीं मानी हार
सृष्टि ने इस शुरुआती नाकामी से हार मानने के बजाय अपनी कमियों को पहचाना और खुद को नए सिरे से तैयार करना शुरू किया। उन्होंने राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, पटना में दाखिला तो ले लिया, पर डॉक्टर बनने के अपने मूल और बड़े सपने को कभी ओझल नहीं होने दिया।
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तीसरे प्रयास को बनाया हथियार
सृष्टि ने नीट 2026 की परीक्षा को अपना अंतिम और निर्णायक प्रयास मानकर पूरी ईमानदारी, कड़े अनुशासन और दिन-रात अटूट मेहनत की। उनकी इसी जिद, कठिन तपस्या और निरंतरता का सुखद परिणाम आज सबके सामने है, जिससे पूरे जमुई जिले में खुशी का माहौल है।
सफलता का दिया पूरा श्रेय
दो भाई-बहनों में सबसे बड़ी सृष्टि ने अपनी इस शानदार उपलब्धि का पूरा श्रेय माता रूबी देवी, पिता राजदेव प्रसाद और शिक्षकों को दिया है। सृष्टि को पूरा विश्वास है कि इस बेहतरीन रैंक के साथ उन्हें सूबे या देश का कोई उत्तम सरकारी मेडिकल कॉलेज आसानी से मिल जाएगा।
समाज सेवा ही एकमात्र लक्ष्य
सृष्टि का छोटा भाई सक्षम कुमार और पूरा परिवार इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अपनी लाडली की इस बड़ी उड़ान से बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहा है। अब सृष्टि का एकमात्र लक्ष्य एक संवेदनशील व योग्य डॉक्टर बनकर देश की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व बेहतर बनाना है।