झाझा-बटिया रेलखंड विस्तार को मिली रफ्तार: 2700 पेड़ कटेंगे, 32 से अधिक मकानों के अधिग्रहण की तैयारी
झाझा-बटिया रेलखंड विस्तार कार्य में तेजी आई है, जिसमें 2700 पेड़ों की कटाई और 32 से अधिक मकानों के अधिग्रहण की तैयारी चल रही है। ...और पढ़ें
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रेलखंड के बीच आने वाले मकान का नापी करते श्रमिकसौजन्य रेल प्रशासन
HighLights
रेलखंड विस्तार के लिए 2700 पेड़ों की कटाई होगी।
32 से अधिक मकानों का अधिग्रहण कर मुआवजा मिलेगा।
परियोजना को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा।
सत्यम कुमार सिंह, झाझा (जमुई)। झाझा–बटिया रेलखंड के विस्तार कार्य को लेकर रेलवे प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। लंबे समय से प्रस्तावित इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए वन विभाग और रेलवे का निर्माण विभाग संयुक्त रूप से आवश्यक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है।<
अधिकारियों के अनुसार, 22 किलोमीटर लंबे रेलखंड के विस्तार के दौरान करीब 2,700 हरे-भरे पेड़ परियोजना की जद में आ रहे हैं। इन पेड़ों की कटाई से पूर्व वन विभाग द्वारा उनका चिन्हांकन किया जा रहा है, ताकि नियमानुसार आगे की कार्रवाई पूरी की जा सके।
वहीं, रेलवे के निर्माण विभाग की टीम रेललाइन के दायरे में आने वाले ग्रामीणों के मकानों की नापी कर रही है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस परियोजना की जद में 32 से अधिक मकान आने की संभावना है। प्रत्येक प्रभावित मकान का विस्तृत सर्वे कर उसका प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है, ताकि मकान मालिकों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।

(रेलवे परिसीमन में आए मकान की जांच करते रेलवे के पदाधिकारीगणसौजन्य रेल प्रशासन)
रेलवे सूत्रों के अनुसार, नापी और मूल्यांकन का कार्य पूरा होने के बाद प्राक्कलन दानापुर मंडल के वरीय अधिकारियों को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्धारित मुआवजा राशि सीधे संबंधित गृहस्वामियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।
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अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और सभी प्रभावित लोगों को नियमानुसार लाभ दिया जाएगा। इधर, भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सभी प्रमुख औपचारिकताएं भी लगभग पूरी हो चुकी हैं।
परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण पूरा होने के साथ ही गजट प्रकाशन तथा दावा-आपत्ति से संबंधित प्रक्रिया भी समाप्त हो चुकी है। इससे परियोजना के निर्माण कार्य में अब किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं बची है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होने के बाद रेलखंड विस्तार का निर्माण कार्य और तेज गति से आगे बढ़ेगा। इस परियोजना के पूरा होने से झाझा–बटिया रेलखंड की क्षमता में वृद्धि होगी, परिचालन अधिक सुगम बनेगा तथा क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल सुविधा का लाभ मिलेगा।
स्थानीय लोगों की नजर अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शीघ्र शुरू होने और समय पर पूरा होने पर टिकी हुई है। मालूम हो कि 2 मार्च, 2019 को इस रेलखंड का शिलान्यास तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं तत्कालीन जमुई सांसद चिराग पासवान ने किया था। इसके बाद लगभग पांच वर्षों तक इस रेलखंड का कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
हालांकि, तत्कालीन सांसद चिराग पासवान तथा वर्तमान जमुई सांसद अरुण भारती द्वारा संसद में लगातार मामला उठाए जाने के बाद इस परियोजना को गति मिली और इसके लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराई गई। झाझा–बटिया रेलखंड के बीच केवल दो स्टेशन सोनो और बटिया बनाए जाएंगे।
कार्य तेजी से चल रहा है। एक सप्ताह के भीतर रेलखंड के दायरे में आने वाले पेड़ों का सर्वे कर उनका चिन्हांकन कर लिया जाएगा। साथ ही प्रभावित मकानों की नापी कर रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि रैयतों को नियमानुसार मुआवजा मिल सके।
रवि कुमार, सेक्शन इंजीनियर (निर्माण)
वन विभाग केवल पेड़ों का मूल्यांकन कर रहा है। रेलखंड की जद में आने वाले सभी पेड़ों का अनुमानित मूल्य निर्धारित किया जाएगा। फिलहाल पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं मिली है।
तेजस जायसवाल, डीएफओ