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    बिहार: बरसात के दिनों में पलायन कर जाते हैं यहां के लोग, बाकी के ग्रामीण मचान पर काटते हैं रात 

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 09:28 PM (IST)

    कटिहार के अमदाबाद प्रखंड में हर साल आने वाली बाढ़ से कई ग्रामीण झारखंड चले जाते हैं। जो गरीब परिवार नहीं जा पाते, वे मवेशियों के साथ मचान पर रहकर बाढ़ ...और पढ़ें

    मचान पर बैठे ग्रामीण। फोटो जागरण

    मचान पर बैठे ग्रामीण। फोटो जागरण

    HighLights

    1. अमदाबाद बाढ़ से ग्रामीण झारखंड पलायन को मजबूर।

    2. गरीब परिवार मवेशियों संग मचान पर काटते हैं रातें।

    3. बाढ़ में सांपों का खतरा, जीवन की बड़ी चुनौती।

    मनीष कुमार सिंह, अमदाबाद (कटिहार)। जब सैलाब जिंदगी का इम्तहान लेने आता है, तो इंसान के हौसले और उसकी विवशता दोनों खुलकर सामने आ जाती है। अमदाबाद प्रखंड में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ सिर्फ पानी का सैलाब नहीं लाती बल्कि बेघर होने का दर्द और अपनों को सुरक्षित रखने की जंग भी अपने साथ लाती है।

    दर्जनों गांव में पानी प्रवेश कर करीब एक महीने तक डेरा जमा लेता है। ऐसे में संपन्न परिवार झारखंड चला जाता है, लेकिन गरीब मचान व चौकी पर बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं।

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    चौकिया पहाड़पुर पंचायत का गदाई दियारा की सीमा झारखंड से लगी है। यहां की आबादी करीब सात हजार है। वार्ड नंबर 10 एवं वार्ड नंबर 11 के करीब 100 परिवार बाढ़ से बचने के लिए झारखंड के महाराजपुर में तीन महीने डेरा डाल देते हैं।

    जान खतरे में डालकर काटते हैं रातें 

    वहीं, गरीब तबके के बड़े बुजुर्ग समेत परिवार पानी के बीच में चौकी लगाकर एवं मचान बनाकर किसी तरह समय को काटते हैं। कुंदन चौधरी, सुग्रीव चौधरी, केसिया देवी एवं अन्य लोग ने कहा कि यहां बाढ़ में मरने कौन रुकेगा।

    हम लोग सपरिवार झारखंड में अपने रिश्तेदार के यहां चले जाते हैं। हालांकि कई ऐसे भी हैं, जो परिवार को झारखंड भेज देते और खुद खेती और मवेशी की देखभाल के लिए यहीं रुक जाते हैं।

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    ग्रामीण माखन सिंह, निवास सिंह, चंदन चौधरी ने बताया कि बाढ़ के दौरान पानी से महिलाओं एवं बच्चों को सुरक्षित रखना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। बिषैले सांप भी बहकर आते हैं। अपने अधिकांश स्वजन को महाराजपुर में अपने रिश्तेदार के यहां भेज देते हैं। खुद मवेशियों के साथ मचान पर ही समय काट लेते हैं।

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    इसी दौरान मायूसी से टूकरी देवी, शिवा सिंह, कुंदन सिंह, बासुदेव सिंह, बिंदा देवी, प्रीतम चौधरी, नंदलाल चौधरी सहित अन्य ने बताया कि वो गरीब कहां जाएंगे। मवेशी है और कुछ खेती। इसी के सहारे साल भर घर चलता है। इसलिए मचान पर सपरिवार रह कर बाढ़ का समय काटते हैं।अमदाबाद में बाढ़ अमीरी-गरीबी को पाट कर देती है।

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