कटिहार में सफाई व्यवस्था पर सवाल: 30 वार्डों की सफाई पर हर माह 80 लाख खर्च, फिर भी गंदगी का अंबार
कटिहार नगर निगम के 30 वार्डों में सफाई पर हर महीने 80 लाख खर्च होने के बावजूद गंदगी का अंबार है, जबकि निजी एजेंसी पर लापरवाही का आरोप है। ...और पढ़ें
-1783224902595_m.webp)
HighLights
30 वार्डों में सफाई पर हर माह 80 लाख खर्च।
निजी एजेंसी पर सफाई में लापरवाही का आरोप।
निगम से निजी एजेंसी की कार्यप्रणाली समीक्षा की मांग।
संवाद सहयोगी, कटिहार। नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच निगम के 30 वार्डों में सफाई कार्य पर हर महीने लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है।
कई इलाकों में कूड़े के ढेर, गंदगी और नालियों की बदहाल स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। नगर निगम के 45 वार्डों में से वार्ड संख्या एक से 9, 16 से 26 तथा 34 से 45 तक की सफाई व्यवस्था निजी एजेंसी को सौंपी गई है।
निरीक्षण के दौरान कटिहार-मनिहारी मुख्य मार्ग पर बुलेट शोरूम के समीप, सहकारिता कार्यालय के पास, बुद्धू चौक, होटल प्रेम पैराडाइज के निकट अस्थायी बस पड़ाव, वार्ड 41 के विभिन्न क्षेत्रों, रामपाड़ा मोहल्ला और रेलवे कालोनी सहित कई स्थानों पर सड़क किनारे कचरा जमा मिला। दोपहर बाद तक भी कई जगहों से कचरे का उठाव नहीं हुआ था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी एजेंसी नियमित रूप से कचरा संग्रहण नहीं कर रही है और नालियों की सफाई में भी लापरवाही बरती जा रही है। कई सड़कों के किनारे घास-फूस उग आए हैं।
मानसून के मौसम में नालियों की सफाई नहीं होने से जलजमाव का खतरा बढ़ गया है। साथ ही कीटनाशकों का छिड़काव नहीं होने से मच्छरों और अन्य जहरीले जीवों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिक राजू यादव, अनिल राय, गुलशन कुमार और मो. नौशाद समेत अन्य लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे नियमित रूप से नगर निगम को कर का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी सफाई सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। उनका कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण बच्चों का बाहर खेलना मुश्किल हो गया है, जबकि बुजुर्गों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
खबरें और भी
वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा सीधे संचालित वार्डों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। वार्ड 12, 13 और 14 समेत निगम के नियंत्रण वाले 15 वार्डों में नियमित सफाई, घर-घर कचरा संग्रहण और जागरूकता अभियान प्रभावी रूप से संचालित होते दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रतिदिन सफाईकर्मी झाड़ू लगाते हैं तथा कचरा संग्रहण वाहन समय पर पहुंचते हैं, जिससे क्षेत्रों में स्वच्छता बनी रहती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब निजी एजेंसी को हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, तब भी संबंधित वार्डों में सफाई व्यवस्था क्यों बदहाल है।
शहरवासियों ने नगर निगम प्रशासन से निजी एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जवाबदेही तय करने और सफाई व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की है।
यह भी पढ़ें- मधुबनी: टेलीग्राम पर टास्क के जाल में फंसी सिपाही की पत्नी, ₹1.77 लाख की हुई साइबर ठगी
यह भी पढ़ें- पटना नगर निगम रिपोर्ट कार्ड: खराब स्ट्रीट लाइट-कचरा गाड़ी सबसे बड़ी परेशाी, 6 महीने में आईं 15,719 शिकायतें