कटिहार में रेलवे बैरिकेडिंग ने बंद किया श्मशान घाट का रास्ता, चारपाई पर शव रखकर पार कराने को मजबूर लोग
कटिहार के कालीबाड़ी गांव में रेलवे बैरिकेडिंग ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है, जिससे श्मशान घाट तक का वर्षों पुराना रास्ता बंद हो गया है। ...और पढ़ें
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चारपाई पर महिला का शव रखकर बैरिकेडिंग पार कराने को मजबूर हुए ग्रामीण
HighLights
कालीबाड़ी गांव में रेलवे बैरिकेडिंग से रास्ता बंद।
नवविवाहिता का शव बैरिकेडिंग पार कर श्मशान ले गए।
ग्रामीणों ने अंडरपास या वैकल्पिक मार्ग की मांग की।
संवाद सूत्र, सालमारी (कटिहार)। आजमनगर थाना क्षेत्र की बघौड़ा पंचायत के कालीबाड़ी गांव में रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए की गई बैरिकेडिंग ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है।
हालात ऐसे हो गए हैं कि अब गांव के लोगों के लिए केवल आवागमन ही नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाना भी चुनौती बन गया है। गांव की 20 वर्षीय नवविवाहिता ताजल देवी उर्फ माला की संदिग्ध मौत के बाद सामने आई तस्वीर ने व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया।
बताया जाता है कि रेलवे की बैरिकेडिंग लगने के बाद गांव से बाहर निकलने का वर्षों पुराना रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को ताजल देवी उर्फ माला के शव को चारपाई पर रखकर बैरिकेडिंग के ऊपर से पार कराना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम ने सभी को भावुक कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि इसी रास्ते से वर्षों से, स्कूली बच्चे, किसान और आम लोग आवाजाही करते रहे हैं। बैरिकेडिंग लगने के बाद मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर रोजमर्रा के आवागमन तक में भारी परेशानी हो रही है। कई बार रेलवे और जिला प्रशासन से अंडरपास अथवा वैकल्पिक मार्ग की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी मरीज की हालत गंभीर हो जाए तो समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। अब तो स्थिति यह है कि अंतिम यात्रा भी सम्मानजनक तरीके से निकालना संभव नहीं रह गया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के साथ आम लोगों की बुनियादी जरूरतों और मानवीय गरिमा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
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बुधवार को सामने आई यह घटना केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि पूरे गांव की पीड़ा को बयां करती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं रेलवे से अविलंब अंडरपास अथवा स्थायी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा इस तरह बाधाओं के बीच निकालने को विवश न होना पड़े।