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    कटिहार में फीकी पड़ी रेशम की चमक, रोशना मलबरी फार्म बना खंडहर; रोजगार की तलाश में 70 मजदूरों का पलायन

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 08:24 AM (IST)

    कटिहार का रोशना मलबरी फार्म, जो कभी शहतूत और रेशम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था, अब खंडहर में तब्दील हो गया है। इसके बंद होने से 70 मजदूर रोजगार की तलाश ...और पढ़ें

    खंडहर में तब्दील रोशना मलबरी फार्म। जागरण

    खंडहर में तब्दील रोशना मलबरी फार्म। जागरण

    HighLights

    1. रोशना मलबरी फार्म उपेक्षा के कारण खंडहर में तब्दील हो गया।

    2. कभी शहतूत की खेती और रेशम उत्पादन का बड़ा केंद्र था।

    3. 70 मजदूरों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ा।

    विवेकानंद सिंह, रोशना (कटिहार)। कभी शहतूत की हरियाली और रेशम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध प्राणपुर प्रखंड का रोशना मलबरी फार्म आज उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो गया है।

    एक समय यहां बड़े पैमाने पर शहतूत की खेती और रेशम उत्पादन होता था, लेकिन अब पूरे परिसर में झाड़-झंखाड़ और जंगल उग आए हैं। विभागीय स्तर पर वर्षों से इसके पुनरुद्धार की चर्चा तो हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

    करीब आठ एकड़ में फैले इस मलबरी फार्म में पांच एकड़ भूमि पर शहतूत की खेती होती थी, जबकि तीन एकड़ में स्थित बड़ा पोखर सिंचाई का प्रमुख स्रोत था। शहतूत की पत्तियों पर रेशम के कीड़ों का पालन कर कोकून तैयार किया जाता था और यहीं रेशम का धागा बनाने की व्यवस्था भी थी। आज धागा निर्माण की मशीनें देखरेख के अभाव में जंग खा रही हैं।

    स्थानीय रोशना बाजार निवासी पशुपति चौधरी एवं गौरीपुर निवासी कन्हैया प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्ष 1998-99 तक फार्म पूरी तरह सक्रिय था। यहां लगभग 70 मजदूर कार्यरत थे, जिनकी आजीविका रेशम उत्पादन से जुड़ी थी।

    फार्म बंद होने के बाद अधिकांश श्रमिक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हो गए। कुछ वर्ष पहले मलबरी फार्म के जीर्णोद्धार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हुई थी।

    अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण भी किया, लेकिन मामला जांच और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गया। कहा कि यदि यहां फिर से शहतूत की खेती और रेशम उत्पादन शुरू कराया जाए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र अपनी पुरानी पहचान फिर से हासिल कर सकेगा।

    वहीं मलबरी फार्म के अनुरक्षक-सह-कृतपालक उमेश कुमार राय ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से यहां कार्यरत हैं। फार्म के पुनर्जीवन को लेकर विभागीय अधिकारियों और जीविका के साथ कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।

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