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    जब बारी-बारी से गिरे 7 पिलर, इंजीनियर समेत 2 मरे; भागलपुर के विक्रमशिला पुल हादसे से ताजा हुईं पुरानी यादें

    Updated: Mon, 04 May 2026 03:59 PM (IST)

    खगड़िया में निर्माणाधीन अगुवानी-सुल्तानगंज महासेतु के पिलर गिरने की तीसरी घटना हुई है, जिसमें अब तक कुल सात पिलर ध्वस्त हो चुके हैं और दो लोगों की जान ...और पढ़ें

    अगुवानी-सुल्तानगंज (अजगैवीनाथ धाम) महासेतु। फोटो जागरण

    अगुवानी-सुल्तानगंज (अजगैवीनाथ धाम) महासेतु। फोटो जागरण

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    संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माणाधीन अगुवानी-सुल्तानगंज (अजगैवीनाथ धाम) महासेतु फिर चर्चा में है। मालूम हो कि यह महासेतु बनने से पूर्व दो हादसे का गवाह बन चुका है। न जाने कब यह महासेतु बनकर तैयार होगा। हालांकि अभी युद्धस्तर पर कार्य जारी है।

    मालूम हो कि 30 अप्रैल 2022 को अगुवानी-सुल्तानगंज महासेतु के पिलर संख्या चार-पांच के बीच का स्ट्रक्चर सुल्तानगंज साइड की ओर से गिर गया था। जिसमें एक इंजीनियर की मौत भी हुई थी, जबकि दूसरी घटना वर्ष 2023 के चार जून की शाम को हुई थी।

    जिसमें अगुवानी साइड से पिलर संख्या 10, 11 और 12 ध्वस्त हो गया था। इसके सेगमेंट भी गिर गए थे, जबकि पिलर संख्या 9 का आधा सेगमेंट गिरा था और एक कर्मी की मौत भी हुई थी।

    तीसरी घटना वर्ष 2024 के 17 अगस्त की सुबह को घटी। निर्माणाधीन महासेतु का पूर्व से क्षतिग्रस्त 9 नंबर पाया का सारा स्लैब लोहे के पिलर सहित गंगा नदी में समा गया।

    1710.77 करोड़ रुपये पानी में मिले

    बिहार सरकार की इस परियोजना को काफी महत्वाकांक्षी माना जाता है। इस परियोजना की लागत का आरंभिक मूल्यांकन 1710.77 करोड़ किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 23 फरवरी 2014 को परबत्ता के KMD कॉलेज मैदान में इसका शिलान्यास किया था।

    9 मार्च 2015 को मुरारका कॉलेज, सुल्तानगंज के मैदान से पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया।

    बताते चलें कि शिलान्यास के समय विभागीय निर्देश मार्च 2020 तक इस महासेतु पर आवागमन शुरू करने का था। लेकिन 2019 की बाढ़ ने बाधा पहुंचाई और यह संभव नहीं हो सका।

    जिसके उपरांत विभाग ने 2021 तक महासेतु पर आवागमन चालू करने का लक्ष्य रखा था फिर कोरोना के कारण लाक डाउन में कार्य बाधित रहा। तब 2022 का लक्ष्य रखा गया। परंतु फिर बाधा आती गई। अब वर्ष 2027 के नवंबर तक निर्माण कार्य पूर्ण कर इस महासेतु होकर आवागमन आरंभ करने का लक्ष्य विभाग ने रखा है।

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