खगड़िया में बाढ़ की तैयारी अधूरी, कोसी-बागमती किनारे कटाव का खतरा बढ़ा
खगड़िया में बाढ़ की अवधि शुरू होने से पहले कोसी और बागमती नदियों के किनारे बसे लोगों में कटाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। 18 में से केवल छह कटाव-रोधी कार ...और पढ़ें

खगड़िया में बाढ़ की तैयारी अधूरी, कोसी-बागमती किनारे कटाव का खतरा बढ़ा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, खगड़िया। सरकार की नजर में एक जून से बाढ़ की अवधि शुरू हो जाती है। एक जून से 31 अक्टूबर तक बाढ़ की अवधि मानी जाती है। वर्षों का अनुभव है कि पहले कोसी-बागमती में उफान आता है। दोनों नदी जब शांत होती है, तो गंगा और बूढ़ी गंडक बढ़ती है।
हालांकि, अभी कोसी और बागमती का जलस्तर उस बिंदु तक भी नहीं पहुंचा है कि उसकी मापी ली जा सके। कहने का मतलब दोनों नदी का जलस्तर अभी काफी नीचे है, लेकिन बतातें चलें कि इस वर्ष कोसी और बागमती में समय से पूर्व लाल पानी (नया पानी) उतरा है, जिसे नदी किनारे के लोग अच्छा संकेत नहीं मान रहे हैं।
दूसरी ओर खगड़िया के गोगरी के पास बूढ़ी गंडक गंगा से संगम करती है, इसलिए गंगा में उफान आने पर बूढ़ी गंडक बढ़ने लगती है। गंगा के बैक वाटर से बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ता है। ये दोनों नदी प्राय: अगस्त-सितंबर में बढ़ती है।
खगड़िया नदी-पानी का जिला है। इसलिए यहां विभागीय स्तर पर और आम जन भी बाढ़ पूर्व तैयारी करते हैं। कोसी-बागमती नदी किनारे बसे लोग संभावित बाढ़-कटाव से आशंकित बने हुए हैं। कोसी और बागमती कब किस करवट लेगी और कितने घरों को अपने में समा लेगी, कहना मुश्किल रहता है।
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18 जगहों पर बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य को लेकर भेजे गए प्रस्ताव, मिली मात्र छह को स्वीकृति
बात सिर्फ कोसी और बागमती की करें, तो इस वर्ष विभागीय स्तर पर बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य को लेकर जिन-जिन जगहों का प्रस्ताव भेजा गया था, उनमें प्राय: को स्वीकृति नहीं मिली। विभाग की ओर से कुल 18 जगहों पर बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य को लेकर प्रस्ताव भेजे गए थे, इनमें मात्र छह को ही स्वीकृति मिली।
छह में दो जगहों पर बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य संपन्न हो चुका है। बीएन तटबंध के 30-31 किलोमीटर वीरबास में बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य पूरा हो चुका है। यहां 150 मीटर में बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य कराए गए हैं। जबकि केबी तटबंध के 31.50 किलोमीटर के सामने बेनहर के पास मार्च में ही बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य करा लिया गया।
मालूम हो कि विभागीय स्तर पर यहां चार सौ मीटर में कार्य को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन मात्र सौ मीटर की स्वीकृति मिली। जहां कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष चार जगहों पर कार्य चल ही रहा है। कार्य समापन की तिथि 31 मई तक थी, लेकिन अब 15 जून तक बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य संपन्न होने की उम्मीद है।
नदी किनारे के लोगों ने कहा: भगवान भरोसे हैं हमलोग
18 में मात्र छह जगहों पर बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य की स्वीकृति मिलने, जहां स्वीकृति मिली भी वहां डिमांड के अनुसार प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगने से कोसी-बागमती किनारे के लोगों में आशंका के बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं।
तेलिहार जमींदारी बांध का पांच-छह किलोमीटर अतिसंवेदनशील बिंदु माना जाता है, परंतु बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य की यहां स्वीकृति नहीं मिली। बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-वन, सोनवर्षा के सहायक अभियंता मनोज कुमार कहते हैं- तेलिहार को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, परंतु स्वीकृति नहीं मिली।
तेलिहार पंचायत के वार्ड नंबर-एक, डांगे सिंह बासा निवासी अमरेश कुमार कहते हैं- हमलोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। शिशवा बांध के अंदर का गांव है। इसे कोसी का ‘प्ले ग्राउंड’ भी कहा जाता है। यहां भी विलेज प्रोटेक्शन वर्क को लेकर विभागीय स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया था।
सहायक अभियंता मनोज कुमार के अनुसार स्वीकृत नहीं मिली। मालूम हो कि बीते वर्ष यहां कोसी नदी ने भयंकर कटाव किया था। यहां के पूर्व पंचायत समिति सदस्य घनश्याम यादव कहते हैं- कोसी में पानी बढ़ने लगा है। जब नदी उफान पर आएगी, तो कुछ भी कहना मुश्किल होगा। हमलोगों को कोई देखने वाला नहीं है।
इधर, सहायक अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि बाढ़ पूर्व कटाव रोधी कार्य को लेकर बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-वन, सोनवर्षा की ओर से 10 प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन मात्र एक को स्वीकृति मिली।
केबी तटबंध के 10 किलोमीटर के सामने बागमती किनारे बसे अग्रहण गांव में 150 मीटर में छह बेडवार बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। जहां कार्य की स्वीकृति नहीं मिली, वहां कटाव की स्थिति में फ्लड फाइटिंग कार्य कराया जाएगा।