किशनगंज में मानसून की आहट: बाढ़ और कटाव का मंडराता खतरा, नदी किनारे बसे लोगों की बढ़ी चिंता
मानसून की दस्तक के साथ किशनगंज जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों के लोग चिंतित हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने और कटाव से हर स ...और पढ़ें
-1783587763378_m.webp)
HighLights
मानसून से किशनगंज में बाढ़ और विस्थापन का खतरा बढ़ा।
सात नदियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं।
तटबंधों को मजबूत करने और पुल बनाने की मांग।
संवाद सहयोगी, किशनगंज। मानसून की दस्तक के साथ ही सात नदियों से घिरे किशनगंज जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगता है। लगातार बारिश ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को आशंका है कि मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने पर एक बार फिर बाढ़ और विस्थापन का संकट झेलना पड़ सकता है।
जिले से होकर बहने वाली महानंदा, डोक, रतुआ, कनकई, बूढ़ी कनकई और मेची जैसी नदियां हर वर्ष जून से सितंबर के बीच तटवर्ती इलाकों में तबाही मचाती हैं। बाढ़ का सबसे अधिक असर टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, कोचाधामन, बहादुरगंज, किशनगंज, पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंडों में देखने को मिलता है। अनुमानित 1.5 से लेकर दो लाख से अधिक आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है।
ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2017 की भीषण बाढ़ की त्रासदी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस समय न केवल ग्रामीण क्षेत्र, बल्कि पूरा किशनगंज शहर भी जलमग्न हो गया था। रेल सेवा भी बाधित हुई थी। जबकि दिघलबैंक प्रखंड लगभग दस दिनों तक सड़क संपर्क से कट गया था।
बाढ़ के साथ-साथ नदी कटाव भी किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। हर वर्ष उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा जाती और कई परिवारों को अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। सरकार और जनप्रतिनिधियों द्वारा कटावरोधी कार्य एवं पुल निर्माण के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जरूरत के अनुरूप अब भी पर्याप्त स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है।
खबरें और भी
कोचाधामन प्रखंड के घुरना चकचकी, बगलबाड़ी, डहुआ, खचपाड़ा, नेमूआ और चरैया बारहमसिया गांव महानंदा नदी के किनारे स्थित हैं। जबकि डोरिया चैनपुर, असूरा, मजकूरी, बलिया सहित कई गांव कनकई नदी से प्रभावित होते हैं। इसी तरह तुलसिया पंचायत सहित कई पंचायतों के लोग हर वर्ष बाढ़ और कटाव की मार झेलते हैं।
टेढ़ागाछ के मटियारी, बैगना, डाकपोखर, बीबीगंज, फुलबरिया और किशनगंज प्रखंड के दौला, पिछला और महीनगांव पंचायतों के ग्रामीण भी हर मानसून में बाढ़ की आशंका के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ और कटाव से स्थायी राहत के लिए तटबंधों को मजबूत करने, आवश्यक नए पुलों का निर्माण कराने और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।